कुचामण-डीडवाना के लादड़िया गांव में वाल्मीकि समाज के युवक की अनोखी पहल, दहेज मुक्त विवाह को मिला बढ़ावा
सीकर। राहुल टांक
जिले के लोसल से सटे कुचामण-डीडवाना क्षेत्र के लादड़िया गांव से एक सराहनीय सामाजिक पहल सामने आई है, जहां वाल्मीकि समाज के एक युवक ने दहेज प्रथा के खिलाफ उदाहरण पेश किया है। कुचामण निवासी प्रदीप कुमार पुत्र रविप्रकाश वाल्मीकि का विवाह लादड़िया गांव निवासी जयचंद की पुत्री ज्योति के साथ सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। इस विवाह की खास बात यह रही कि प्रदीप ने दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया और मात्र एक रुपये व नारियल लेकर शादी की रस्म पूरी की। वहीं दहेज के रूप में उन्हें भगवान बुद्ध की प्रतिमा भेंट की गई।यह पहल न केवल वाल्मीकि समाज बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है और दहेज मुक्त विवाह को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। प्रदीप कुमार का कहना है कि दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए समाज के हर व्यक्ति को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि बेटी की शादी के समय पिता अक्सर अपनी सामर्थ्य से अधिक खर्च करता है, जिससे गरीब परिवार आर्थिक रूप से टूट जाते हैं।उन्होंने कहा कि दहेज लेने से कोई बड़ा नहीं बनता, बल्कि उन्होंने अपनी शादी में दहेज को नकारकर उन लोगों को संदेश दिया है जो दहेज के बड़े-बड़े सपने देखते हैं।प्रदीप ने बताया कि बचपन में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया था, जिसके बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां संभाली और जीवन में संघर्ष करते हुए यह निर्णय लिया।
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