तीसरा आरोपी गिरफ्तार, जयपुर के निजी अस्पताल का डायलिसिस टेक्नीशियन निकला खरीदार
नवलगढ़ । झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
जिला अस्पताल से लाखों रूपए के ह्यूमन एल्ब्यूमिन इंजेक्शन चोरी मामले में पुलिस जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। मामले में पुलिस ने तीसरे आरोपी को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। गिरफ्तार आरोपी विकास सैनी जयपुर के एक निजी अस्पताल में डायलिसिस टेक्नीशियन के रूप में कार्यरत है और चोरी किए गए इंजेक्शनों का खरीदार बताया जा रहा है। सीआई अजय सिंह के अनुसार आरोपी विकास सैनी को बबाई से गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह मुख्य आरोपी देवेंद्र सिंह से चोरी के इंजेक्शन खरीदता था और दोनों के बीच नियमित आर्थिक लेन-देन भी होता था।
ट्रेनिंग से बनी पहचान, फिर तैयार हुआ सप्लाई नेटवर्क
पुलिस जांच में यह अहम तथ्य सामने आया है कि विकास सैनी और देवेंद्र सिंह ने एक साथ ट्रेनिंग ली थी। इसी पुरानी पहचान का फायदा उठाकर दोनों ने मिलकर इंजेक्शनों की अवैध खरीद-फरोख्त का नेटवर्क तैयार किया। अस्पताल से चोरी कर महंगे इंजेक्शन बाहर सप्लाई किए जा रहे थे, जिससे पूरे मामले में संगठित गिरोह की आशंका गहराती जा रही है।
कहां खप रहे थे इंजेक्शन? पुलिस की नजर अब बड़े नेटवर्क पर
अब पुलिस का फोकस इस बात पर है कि चोरी किए गए इंजेक्शन आखिर किन जगहों पर और किन लोगों को बेचे जा रहे थे। आशंका है कि यह नेटवर्क अन्य शहरों और निजी अस्पतालों तक फैला हो सकता है। इससे पहले पुलिस मुख्य आरोपी दीपाली कुमावत और देवेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। तीसरी गिरफ्तारी के बाद जांच और तेज कर दी गई है तथा अन्य संभावित आरोपियों की तलाश जारी है। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और महंगी जीवनरक्षक दवाओं की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों रुपए के इंजेक्शन चोरी होना न केवल सिस्टम की कमजोरी दर्शाता है, बल्कि मरीजों की जिंदगी के साथ भी बड़ा जोखिम पैदा करता है।










