झुंझुनूं में संविदा शिक्षिका पर धर्म परिवर्तन के प्रयास का आरोप

ग्रामीणों ने नवोदय विद्यालय के बाहर किया प्रदर्शन

सूरजगढ़ । झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ पंचायत समिति क्षेत्र के काजड़ा गांव में एक संविदा शिक्षिका पर धर्म परिवर्तन के प्रयास का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने जवाहर नवोदय विद्यालय के मुख्य द्वार के बाहर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। बाद में पुलिस की समझाइश के बाद ग्रामीण शांत हुए और प्रतिनिधिमंडल ने पिलानी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों का आरोप है कि जवाहर नवोदय विद्यालय में संविदा पर कार्यरत एक शिक्षिका पिछले कुछ समय से गांव में सक्रिय है और घर-घर जाकर महिलाओं व अन्य ग्रामीणों से संपर्क कर रही है। ग्रामीणों के अनुसार, इस दौरान कथित रूप से धार्मिक चर्चाओं के जरिए एक विशेष धर्म के प्रति प्रेरित करने तथा दूसरे धर्म के प्रति नकारात्मक बातें कहने का प्रयास किया गया। कुछ ग्रामीणों ने धार्मिक साहित्य और पुस्तकें बांटने की बात भी कही है। सूचना मिलते ही पिलानी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। पिलानी थानाधिकारी चंद्रभान चौधरी ने बताया कि काजड़ा गांव में नवोदय विद्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन की सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। ग्रामीणों ने एक शिकायत पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया है कि विद्यालय की एक शिक्षिका गांव की महिलाओं और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को धर्म विशेष के बारे में गुमराह कर रही है। थानाधिकारी ने बताया कि ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया है कि उनकी शिकायत की गंभीरता से जांच की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से कानून हाथ में नहीं लेने और विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाने की अपील की। इसके बाद शुक्रवार रात करीब 10 बजे ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पिलानी थाने पहुंचकर शिक्षिका के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। गांव के पूर्व उप सरपंच मदन चनेजा और पंच प्रतिनिधि पवन गुर्जर ने कहा कि गांव में लंबे समय से भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बना हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से ग्रामीण इन गतिविधियों को लेकर चिंतित थे, जिसके चलते सामूहिक रूप से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया। ग्रामीण विक्रम शर्मा ने कहा कि प्रशासन को मामले की तह तक जाकर निष्पक्ष जांच करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचा जा सके और सामाजिक सद्भाव बना रहे। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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