नियमों की अनदेखी कर संचालित कई विवाह स्थल, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल — आयकर और नगर निकाय को लग रहा करोड़ों का चूना
झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
जानकारो का कहना है कि जिले में शादी-समारोहों का सीजन आते ही मैरिज गार्डन और विवाह स्थलों का कारोबार चरम पर पहुंच जाता है, लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक बड़ा काला सच भी सामने आ रहा है। झुंझुनूं जिले में संचालित कई मैरिज गार्डन ऐसे हैं जो बिना आवश्यक परमिशन और लाइसेंस के ही धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, जबकि कुछ संचालक अपनी वास्तविक आमदनी छुपाकर आयकर विभाग और सरकार को भारी राजस्व हानि पहुंचा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार जिले के कई मैरिज गार्डन न तो नगर निकाय से विधिवत अनुमति लेते हैं और न ही अग्नि सुरक्षा, पार्किंग और अन्य अनिवार्य मानकों का पालन करते हैं। बावजूद इसके, शादी-समारोहों के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। एक-एक समारोह के लिए लाखों रुपये तक वसूले जा रहे हैं, लेकिन अधिकांश लेन-देन नकद में कर सरकारी रिकॉर्ड से दूर रखा जाता है। जानकारों का कहना है कि कई विवाह स्थलों पर साल भर में दर्जनों बड़े आयोजन होते हैं, जिनसे लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये की आय होती है। इसके बावजूद आयकर रिटर्न में इनकी आय बेहद कम दर्शाई जाती है। इस तरह सरकार के खजाने को हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंच रहा है।सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई स्थानों पर बिना किसी सुरक्षा मानकों के ही कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। आग से सुरक्षा, पार्किंग व्यवस्था, आपातकालीन निकास और भीड़ प्रबंधन जैसे नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और आयकर विभाग संयुक्त रूप से जांच करे तो जिले में संचालित कई मैरिज गार्डनों की वास्तविक आय और कानूनी स्थिति का बड़ा खुलासा हो सकता है। इससे न केवल अवैध संचालन पर रोक लगेगी बल्कि सरकार को भी भारी राजस्व प्राप्त हो सकेगा। इधर, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले के सभी मैरिज गार्डनों का व्यापक सर्वे कराया जाए, उनकी परमिशन, सुरक्षा मानकों और आय के रिकॉर्ड की जांच की जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।यदि समय रहते प्रशासन ने सख्ती नहीं दिखाई तो झुंझुनूं में ‘शादी उद्योग’ के नाम पर चल रहा यह अवैध कारोबार और भी बेलगाम होता जाएगा, जिसका खामियाजा सरकार के राजस्व और आम जनता दोनों को भुगतना पड़ेगा।













