सरपंच और पंच चुनने के लिए पत्नी सरोज धनखड़ के साथ पहुंचे मतदान केंद्र , बोले— गांव में वोट डालने का अलग ही मजा, सही जनप्रतिनिधि चुनने से होगा विकास


सुलताना ।झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
लोकतंत्र की असली खूबसूरती तब नजर आती है, जब जिम्मेदार पदों पर रह चुके जनप्रतिनिधि भी आम मतदाता की तरह अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए आगे आते हैं। ऐसा ही अनूठा उदाहरण शुक्रवार को झुंझुनूं जिले के किठाना गांव में देखने को मिला। राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी) के पूर्व चेयरमैन एवं पूर्व मंत्री रणदीप धनखड़ विशेष रूप से जयपुर से अपने पैतृक गांव किठाना पहुंचे और सरपंच व अपने वार्ड का पंच चुनने के लिए मतदान किया।
उनके इस कदम ने ग्रामीण लोकतंत्र के प्रति जुड़ाव और मतदान के महत्व का संदेश दिया। आरटीडीसी के पूर्व चेयरमैन रणदीप धनखड़ अपनी पत्नी सरोज धनखड़ के साथ मतदान केंद्र पहुंचे। मंत्री का दर्जा प्राप्त कर चुके धनखड़ ने किसी विशेष व्यवस्था के बजाय आम मतदाता की तरह कतार में लगकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उन्होंने गांव की सरकार चुनने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी निभाते हुए यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में हर वोट की अपनी अहमियत है और जनप्रतिनिधि से लेकर आम नागरिक तक सभी की भागीदारी जरूरी है।
गांव में आकर वोट डालने का अलग ही मजा
मतदान के बाद पूर्व मंत्री रणदीप धनखड़ ने कहा कि लोकतंत्र में वोट का सबसे ज्यादा महत्व है। गांव में आकर अपना वोट डालने का अलग ही मजा है। मतदान से गांव की सरकार बनेगी। यदि अच्छे और सही लोगों का चुनाव होगा तो गांव का विकास भी बेहतर तरीके से होगा। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से मतदान करने की अपील करते हुए कहा कि एक-एक वोट लोकतंत्र को मजबूत बनाता है।
मताधिकार का प्रयोग करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है और गांव के विकास के लिए सही प्रतिनिधियों का चुनाव बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि रणदीप धनखड़ इससे पहले जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में भी मतदान करने के लिए जयपुर से अपने पैतृक गांव किठाना पहुंचे थे। अब सरपंच और पंच के चुनाव में भी उन्होंने गांव पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
उनका यह कदम बताता है कि व्यस्तता और जिम्मेदारियों के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी को प्राथमिकता देना कितना महत्वपूर्ण है। किठाना में उनका मतदान ग्रामीण लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता और अपने गांव से जुड़ाव का उदाहरण बनकर सामने आया।














