आतंकियों से मुठभेड़ में अदम्य साहस दिखाकर हुए थे शहीद, परिवार की तीन पीढ़ियों का देशसेवा से जुड़ा गौरवशाली इतिहास
खेतड़ी।झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
खेतड़ी तहसील के प्रथम शौर्य चक्र विजेता शहीद नेत्रभान सिंह का शहादत दिवस गुरूवार को उनके गांव गाड़राटा में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई तथा उनके अदम्य साहस, वीरता और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद किया गया। कार्यक्रम में युवाओं को शहीद के जीवन से प्रेरणा लेकर देशसेवा के लिए आगे आने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैप्टन लक्ष्मण सिंह तंवर थे, जबकि अध्यक्षता पृथ्वी सिंह ने की।
अतिथियों ने शहीद नेत्रभान सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। मुख्य अतिथि कैप्टन लक्ष्मण सिंह तंवर ने कहा कि खेतड़ी तहसील की धरती ने अनेक वीर योद्धाओं को जन्म दिया है, जिन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। यहां पीढ़ी-दर-पीढ़ी देशसेवा की गौरवशाली परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि शहीद नेत्रभान सिंह भारतीय सेना की 11 राजरिफ में सेवारत थे। 22 अक्टूबर 1992 को जम्मू-कश्मीर के अवंतीपुर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान उन्होंने अदम्य वीरता का परिचय देते हुए इनामी आतंकवादी गाजी खान और उसके तीन साथियों को मार गिराया।
इसी दौरान गोली लगने से वे देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। उनकी वीरता और अदम्य साहस के सम्मान में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने उन्हें यह वीरता पुरस्कार प्रदान किया था। शहीद नेत्रभान सिंह का परिवार देशसेवा की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक रहा है। उनके दादाजी ने प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया था, जबकि उनके पिता हरिकिशन सिंह ने द्वितीय विश्व युद्ध में राजपूताना राइफल्स में सेवाएं दी थीं।
परिवार की इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनके पुत्र पृथ्वी सिंह और भतीजे वीरेंद्र सिंह भी वर्तमान में भारतीय सेना में सेवाएं देकर देश की रक्षा में योगदान दे रहे हैं। कैप्टन लक्ष्मण सिंह तंवर ने कहा कि शहीद राष्ट्र की अमूल्य धरोहर होते हैं। उनका त्याग, साहस और बलिदान सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। युवाओं को शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रसेवा, अनुशासन और समर्पण की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
इस अवसर पर समरजीत सिंह, वीरेंद्र सिंह, राजेश सिंह, विजयपाल सिंह, राजेश कुमार, सुरेंद्र सिंह, पृथ्वी सिंह, महेंद्र गुर्जर, पवन दधीच, दुर्गा प्रसाद, उमाशंकर फरेरा, मुरारी लाल शर्मा, विनोद गुप्ता, नरेंद्र सिंह और रतिपाल सिंह सहित अनेक लोग मौजूद रहे। सभी ने शहीद नेत्रभान सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके बलिदान को नमन किया। शहीद नेत्रभान सिंह की शौर्यगाथा आज भी क्षेत्र के युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित कर रही है। उनका बलिदान देशभक्ति, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा की ऐसी मिसाल है, जिसे आने वाली पीढ़ियां सदैव याद रखेंगी।















