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Home राजस्थान झुंझुनूं चंचलनाथ टीले पर महाआरती में उमड़ा श्रद्धा और भक्ति का सैलाब

चंचलनाथ टीले पर महाआरती में उमड़ा श्रद्धा और भक्ति का सैलाब

झुंझुनूं के चंचलनाथ टीले पर मां कालरात्रि की पूजा और भव्य महाआरती में शामिल श्रद्धालु

मां कालरात्रि की आराधना में लीन हुए श्रद्धालु, महंत ओमनाथ महाराज के सानिध्य में हुआ पूजन-अनुष्ठान

झुंझुनूं।अजीत जांगिड़
शहर के प्रसिद्ध चंचलनाथ टीले पर चल रहे दुर्गा पूजा महोत्सव एवं शतचंडी महायज्ञ के सातवें दिन शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। माता रानी के दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और माता के जयकारों से पूरा टीला भक्तिमय हो उठा।झुंझुनूं के चंचलनाथ टीले पर मां कालरात्रि की पूजा और भव्य महाआरती में शामिल श्रद्धालु

महंत ओमनाथ महाराज के सानिध्य में हुए धार्मिक अनुष्ठान – चंचलनाथ टीले के पीठाधीश्वर महंत ओमनाथ महाराज के सानिध्य में मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना, शतचंडी महायज्ञ और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा कर माता के समक्ष शीश नवाया तथा परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। महोत्सव के दौरान टीले पर दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रही। महंत ओमनाथ महाराज ने मां कालरात्रि की महिमा बताते हुए कहा कि नवरात्र के सातवें दिन मां के इस स्वरूप की आराधना का विशेष महत्व है। मां कालरात्रि अपने भक्तों के भय को दूर कर उन्हें साहस, निर्भयता और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं। स्वरूप में उग्र दिखाई देने वाली मां अपने भक्तों के लिए कल्याणकारी हैं, इसी कारण उन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि मां कालरात्रि की आराधना को नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति, संकटों से रक्षा और जीवन में शुभता के संचार का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र में मां के प्रत्येक स्वरूप की पूजा का अपना विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व है। मां कालरात्रि की उपासना श्रद्धालुओं को विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देती है।झुंझुनूं के चंचलनाथ टीले पर मां कालरात्रि की पूजा और भव्य महाआरती में शामिल श्रद्धालु

शंखनाद और ढोल-नगाड़ों के बीच हुई भव्य महाआरती – महोत्सव के सातवें दिन शाम को शंखनाद, ढोल-नगाड़ों और भक्तिमय संगीत के बीच भव्य संगीतमय महाआरती का आयोजन किया गया। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से मां दुर्गा की स्तुति की। पूरा परिसर दीपों की रोशनी, भक्ति संगीत और माता के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त किया। आयोजन ने चंचलनाथ टीले को आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रमुख केंद्र के रूप में जीवंत कर दिया।

संतों, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने की सहभागिता – इस अवसर पर संत विजयनाथ महाराज, निरंजननाथ महाराज, विचारनाथ महाराज, अभयनाथ महाराज, राजनाथ महाराज और गणपतनाथ महाराज का सानिध्य रहा। जिला कलेक्टर डॉ. अरूण गर्ग, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी परशुराम धानका, उपखंड अधिकारी रामकरण बिजाणिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेंद्र सिंह राजावत, नगर परिषद सभापति अब्दुल्ला अगवान ने भी महोत्सव में सहभागिता की। इसके अलावा पार्षद उमर कुरैशी, मनोज सैनी, मनोज राजौरिया और राजकुमार डिग्रवाल, मुख्य यजमान अमरनाथ जांगिड़, डॉ. उमेश केडिया, डॉ. निशांत पुरोहित और दीपक जांगिड़ सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। चंचलनाथ टीले पर आयोजित दुर्गा पूजा एवं शतचंडी महोत्सव के सातवें दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने क्षेत्र की धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा को प्रदर्शित किया। महोत्सव के धार्मिक आयोजनों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आया।

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