विश्व एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग दिवस पर रेलवे स्टेशन पर चला हस्ताक्षर अभियान, बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए जनभागीदारी का दिया संदेश
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झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
विश्व एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग दिवस के अवसर पर गुरूवार को झुंझुनूं में मानव तस्करी जैसी गंभीर सामाजिक बुराई के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान आयोजित किया गया। जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन, राजस्थान महिला कल्याण मंडल, चाचियावास–अजमेर एवं राजस्थान पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र सिंह राजावत ने मानव तस्करी रोकथाम संबंधी जागरूकता पोस्टर का विमोचन कर अभियान का शुभारंभ किया।इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र सिंह राजावत ने कहा कि मानव तस्करी मानवता के विरुद्ध सबसे जघन्य अपराधों में से एक है, जिसका शिकार सबसे अधिक बच्चे और महिलाएं होती हैं। उन्होंने कहा कि इस अपराध पर प्रभावी अंकुश तभी संभव है, जब पुलिस, प्रशासन, सामाजिक संस्थाएं और आमजन मिलकर जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, संदिग्ध व्यक्ति अथवा मानव तस्करी से जुड़े मामलों की सूचना तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पोस्टर विमोचन के बाद झुंझुनूं रेलवे स्टेशन पर मानव तस्करी के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया गया। अभियान के दौरान यात्रियों, रेलवे कर्मचारियों एवं आमजन को मानव तस्करी के विभिन्न स्वरूपों, इसके दुष्परिणामों तथा इससे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। बड़ी संख्या में लोगों ने हस्ताक्षर कर मानव तस्करी के विरुद्ध समाज को जागरूक बनाने और इस अपराध के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट से एएसआई सुरेश, कांस्टेबल अनिल, रेलवे स्टेशन अधीक्षक नरेन्द्र गहलोत, आरपीएफ इकाई प्रभारी राजीव राव, तथा राजस्थान महिला कल्याण मंडल की ओर से जिला समन्वयक चेतना शर्मा, टीना चौरसिया, अदिति मीणा एवं विनोद सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने संयुक्त रूप से मानव तस्करी के विरुद्ध जनजागरूकता बढ़ाने, बच्चों एवं महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा समाज की सक्रिय भागीदारी को मजबूत करने का संदेश दिया।आयोजकों ने बताया कि अभियान का उद्देश्य समाज को मानव तस्करी के प्रति संवेदनशील बनाना, नागरिकों को सतर्क करना, बच्चों एवं महिलाओं की सुरक्षा के लिए सामुदायिक सहयोग को बढ़ावा देना तथा मानव तस्करी मुक्त समाज के निर्माण में जनभागीदारी को सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जागरूक नागरिक और सतर्क समाज ही मानव तस्करी जैसी गंभीर चुनौती के विरुद्ध सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच साबित हो सकते हैं।
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