“गौवध पर लगे पूर्ण प्रतिबंध, अब नहीं तो कब?” — आचार्य विष्णुकांत शास्त्री का आह्वान
झुंझुनूं I अजीत जांगिड़
वृंदावन के प्रख्यात संत, विश्व विख्यात वाणी विभूषण एवं गौ सेवा को समर्पित संत आचार्य विष्णुकांत शास्त्री ‘श्री राम वृंदावन वाले’ ने देशभर में गौवध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की जोरदार वकालत करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि पूरे भारत में गौवध को पूरी तरह बंद किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से राजस्थान में भी गौ संरक्षण को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। एक धार्मिक कथा कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता महेश बसावतिया से हुई विशेष मुलाकात में आचार्य विष्णुकांत शास्त्री ने गौ माता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि गौ रक्षा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और मानवता के संरक्षण का भी आधार है। उन्होंने कहा कि बार-बार उनके मन में यही भाव आता है कि “अब यदि गौवध बंद नहीं होगा तो फिर कब होगा?” इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों को इस दिशा में ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने चाहिए।श्री गोपीनाथ सेवा धाम आश्रम एवं माता वैष्णो देवी मंदिर, छठीकरा, श्रीधाम वृंदावन (उत्तर प्रदेश) में विराजमान आचार्य विष्णुकांत शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और श्रीमद्भागवत महापुराण में भी गौ सेवा और गौ संरक्षण का विशेष महत्व बताया गया है। उन्होंने कहा कि जहां गौ माता की रक्षा होती है, वहीं धर्म, संस्कृति और सनातन मूल्यों का विस्तार संभव होता है। आचार्य शास्त्री ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वे स्वयं राजस्थान आकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात करेंगे और प्रदेश में गौवध पर पूर्ण रोक सहित गौ संरक्षण के विषय में विस्तार से चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं और उनकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक एवं धार्मिक दायित्व है।अपनी मधुर व प्रभावशाली वाणी के लिए देशभर में प्रसिद्ध आचार्य विष्णुकांत शास्त्री ने श्रद्धालुओं से भी गौ सेवा और गौ संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज के सामूहिक प्रयासों से ही गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। भाजपा नेता महेश बसावतिया ने बताया कि आचार्य विष्णुकांत शास्त्री ने अत्यंत सरल, सहज और तर्कपूर्ण शैली में गौ माता के महत्व को समझाया तथा गौ रक्षा को राष्ट्र और धर्म हित का विषय बताया। उनकी प्रेरणादायी वाणी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया।













