बाकरा गैस प्लांट में धधकी आग, प्रशासन ने परखी अपनी ताकत, मॉक ड्रिल, पांच मिनट में पहुंची टीमें
झुंझुनूं।अजीत जांगिड़
जिले के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाकरा रोड स्थित रसोई गैस प्लांट पर शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई। जब सूचना मिली कि प्लांट पर हवाई हमला हुआ है और वहां भीषण आग लग गई है। देखते ही देखते सायरन बजाती गाड़ियां गैस प्लांट की ओर दौड़ पड़ीं। दरअसल, यह जिला प्रशासन द्वारा आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए आयोजित की गई एक मॉक ड्रिल थी। पुलिस कंट्रोल रूम को जैसे ही सूचना मिली कि गैस प्लांट में हवाई हमले के कारण आग लग गई है। प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग, एसपी कावेंद्र सागर और एडीएम डॉ. अजय आर्य एक साथ शाम 5:11 बजे घटनास्थल पर पहुंच गए। पहुंचने का समय को बारीकी से नोट किया। ताकि यह पता चल सके कि वास्तविक संकट के समय हमारी टीमें कितनी मुस्तैद हैं। बचाव कार्य में सबसे पहले पहुंचने का रिकॉर्ड एम्बुलेंस और एसडीआरएफ के नाम रहा। एम्बुलेंस व एसडीआरएफ की टीम सबसे पहले शाम 5 बजकर 06 मिनट पर पहुंची। इसके बाद पुलिस टीम पहुंची। होमगार्ड व यातायात पुलिस 5.09 बजे, कलेक्टर, एसपी व एडीएम 5.11 बजे, फायर ब्रिगेड 5.13 बजे, एसएचओ कोतवाली 5.14 बजे, सिविल डिफेंस 5.19 बजे बजे पहुंची।
युद्ध स्तर पर बचाव कार्य का प्रदर्शन
प्लांट में आग लगने की स्थिति पैदा की गई, जिसे फायर ब्रिगेड की टीमों ने आधुनिक उपकरणों की मदद से बुझाने का अभ्यास किया। हवाई हमले की सूरत में घायलों को मलबे या आग के बीच से निकालने के लिए एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस के जवानों ने मोर्चा संभाला। मौके पर मौजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घायलों को तुरंत फर्स्ट एड दिया। गंभीर रूप से घायल डमी मरीजों को एम्बुलेंस के जरिए तुरंत हायर सेंटर भेजने का सफल अभ्यास किया गया। कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने बताया कि गैस प्लांट जिला का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। यहां किसी भी प्रकार की चूक बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है। शुक्रवार को की गई ड्रिल में सभी विभागों का समन्वय और समय की पाबंदी संतोषजनक रही। एएसपी देवेंद्र राजावत ने कहा कि हवाई हमले जैसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों में पुलिस और आपदा प्रबंधन का तालमेल बहुत जरूरी है। इस अभ्यास से हमें अपनी कमियों को सुधारने और तैयारियों को पुख्ता करने का मौका मिला है।













