डंपर-बोलेरो की भीषण भिड़ंत: 3 बाराती जिंदा जले, 5 जिंदगी और मौत के बीच जंग

एनएच -709 बना ‘मौत का हाईवे’, 45 मिनट देर से पहुंची मदद, उठे बड़े सवाल बार-बार हादसों के बावजूद सुरक्षा इंतजाम नदारद

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
राजगढ़-पिलानी नेशनल हाईवे-709 गुरुवार रात एक दिल दहला देने वाले हादसे का गवाह बना, जहां तेज रफ्तार डंपर और बोलेरो की आमने-सामने भिड़ंत में तीन युवकों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। हादसा रात करीब 10 बजे हुआ, जिसने पूरे इलाके में अफरा-तफरी और मातम का माहौल पैदा कर दिया। बताया जा रहा है कि बोलेरो में सवार युवक हनुमानगढ़ के मनदपुरा गांव से पिलानी एक बारात में शामिल होने जा रहे थे। लेकिन रास्ते में ही मौत ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

टक्कर के बाद आग का गोला बने वाहन, निकलने का नहीं मिला मौका

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रोड़ी से भरा डंपर राजगढ़ की ओर जा रहा था, तभी सामने से आ रही बोलेरो से उसकी सीधी भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि धमाके के साथ दोनों वाहन आग की लपटों में घिर गए।कुछ ही पलों में आग ने विकराल रूप ले लिया और बोलेरो में सवार तीन युवक बाहर निकलने से पहले ही जिंदा जल गए। हादसे के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई और लंबा जाम लग गया। सूचना पर हमीरवास थाना पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया।

5 झुलसे, हालत नाजुक—जयपुर रेफर

पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद पांच युवकों को जलती गाड़ी से बाहर निकाला, जो लगभग 50 प्रतिशत से अधिक झुलस चुके हैं। उन्हें तुरंत पिलानी के बिड़ला अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल और फिर जयपुर रेफर किया गया। हादसे में पंकज (20), कमल (22), आनंद (20) — मनदपुरा (हनुमानगढ़) विकास (24) — सिद्धमुख, आशिष (20) — हिसार , घायल हुए ।

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देरी से पहुंची एम्बुलेंस और दमकल, तीन जिंदगियों पर भारी?

हादसे के बाद राहत कार्य में भारी लापरवाही उजागर हुई। घटनास्थल पिलानी के पास होने के बावजूद एम्बुलेंस और दमकल को पहुंचने में करीब 45 मिनट लग गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर आग पर काबू पा लिया जाता, तो शायद तीन जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

टोल प्लाजा पर नहीं मिली आपात सुविधा

नियमों के मुताबिक टोल प्लाजा पर आपातकालीन सेवाएं अनिवार्य होती हैं, लेकिन हादसे के समय वहां न तो दमकल उपलब्ध थी और न ही त्वरित चिकित्सा सुविधा। यह लापरवाही अब प्रशासन और नेशनल हाईवे अथॉरिटी पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।

घनी झाड़ियां बनीं हादसों की वजह

हाईवे के मोड़ पर उगी झाड़ियों और जंगली पौधों के कारण सामने से आने वाला वाहन दिखाई नहीं देता। यही वजह इस मार्ग पर लगातार हो रहे हादसों की बड़ी वजह बनती जा रही है।

एनएच -709 बनता ‘डेथ जोन’: एक साल में 8 मौतें

आंकड़े बेहद डरावने हैं। पिछले एक साल में इस 20 किलोमीटर के दायरे में 8 लोगों की जान जा चुकी है। थिरपाली के पास एक ही स्थान पर अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, फिर भी सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं।थानाधिकारी रायसिंह सुथार के अनुसार आग इतनी भीषण थी कि मृतकों के शव पूरी तरह जल चुके हैं, जिससे उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो रहा है। शवों को चूरू जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है।

कब जागेगा सिस्टम? कब रुकेगा एनएच -709 पर मौत का सिलसिला?

बार-बार हो रहे हादसों के बावजूद सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी अब सीधे-सीधे लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।