डॉ भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रेरित पहल—मंदिर परिसर में रोज लगती नि:शुल्क कक्षा, सामाजिक समरसता का भी संदेश
सीकर । राहुल टांक
बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर ने कहा था शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा। डॉ अंबेडकर के इस अमर संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लेकर जिले के हर्ष गांव से एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां ननंद-भाभी की जोड़ी ने शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की है। आरती और उनकी भाभी सुनीता बागड़ी ने करीब डेढ़ साल पहले एक छोटा सा कदम उठाते हुए गांव के बाबूजी महाराज मंदिर में नि:शुल्क ट्यूशन क्लास शुरू की थी, जो आज एक सशक्त अभियान का रूप ले चुकी है।
सुनीता बागड़ी ने बताया कि हर दिन शाम 4 से 6 बजे तक चलने वाली इस कक्षा में शुरुआत में कुछ ही बच्चे आते थे, लेकिन अब यहां 50 से 60 बच्चे नियमित रूप से पढ़ने पहुंच रहे हैं। इस पहल की खास बात यह है कि इसमें सभी जाति और वर्ग के बच्चे एक साथ बैठकर शिक्षा ग्रहण करते हैं, जिससे आपसी भाईचारे और समानता का संदेश भी फैल रहा है। इस प्रयास का असर बच्चों के जीवन में साफ दिखाई देने लगा है। जो बच्चे पहले अपना समय इधर-उधर बिताते थे, वे अब पढ़ाई के प्रति गंभीर हो गए हैं। उनकी पढ़ाई में सुधार हुआ है, साथ ही अनुशासन और आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
आरती ने बताया कि बच्चे बताते हैं कि यहां उन्हें पढ़ाई आसानी से समझ आती है और उनका होमवर्क भी समय पर पूरा हो जाता है।गांव में पानी की कमी जैसी समस्याएं होने के बावजूद लोगों का सहयोग इस पहल को मजबूती दे रहा है। अभिभावक अपने स्तर पर बच्चों के लिए पानी की व्यवस्था कर रहे हैं, ताकि पढ़ाई बाधित न हो।
ग्रामीणों ने बताया कि यह पहल सिर्फ शिक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सहयोग, समर्पण और सकारात्मक सोच का प्रतीक बन गई है। आरती और सुनीता की यह कोशिश न केवल बच्चों का भविष्य संवार रही है, बल्कि पूरे गांव को एक नई दिशा भी दे रही है।
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