शिक्षाविद प्रो. डॉ. मूलचंद भारतेंदु हरिश्चंद्र अंतर्राष्ट्रीय गौरव सम्मान से हुये सम्मानित

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चूरू। संस्कृत भाषा एवं देवनागरी लिपि के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए चूरू के राजकीय लोहिया महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. मूल चन्द को भारतेंदु हरिश्चंद्र अंतर्राष्ट्रीय गौरव सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान देवनागरी फाउंडेशन भारत तथा अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के संयुक्त तत्वावधान में 15 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राजेंद्र भवन, आई.टी.ओ. में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में प्रदान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के रसाचार्य डॉ. आई. मेड धर्मयाशा, डॉ. सौरभ पांडेय (मानद कुलपति, जगत धर्म चक्रवर्ती धरा धाम विश्व सद्भाव पीठ), प्रो. देवेश कुमार मिश्रा (आचार्य संस्कृत) व मानविकी पीठ प्रमुख, इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी, दिल्ली, डॉ. नारायण यादव (निदेशक, एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, श्रीलंका) ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जनरल सर प्रो. डॉ. जसवीर सिंह (संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका के आधिकारिक प्रतिनिधि), इंद्रजीत शर्मा (अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद व हिंदी संवर्धक, न्यूयॉर्क), डॉ. शंभू पंवार, अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार डॉ. इस्लाम मलिक मवाना (उत्तर प्रदेश), देवनागरी फाउंडेशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सुनील कुमार दुबे सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित थे। राष्ट्रीय क्रांतिकारी संत आचार्य डॉ. मंजीत सिंह दहिया लाखनमाजरा हरियाणा, डॉ. अरुण शर्मा, डॉ. कबीर (टाइगर) तथा डॉ. राकेश वशिष्ठ ने भी सहयोगी भूमिका निभाई। प्रो. डॉ. मूल चन्द को सम्मान प्रदान करते हुए मुख्य अतिथियों ने उनके शैक्षणिक अनुसंधान, संस्कृत साहित्य के प्रति समर्पण तथा देवनागरी लिपि को वैश्विक पहचान दिलाने के अथक प्रयासों की सराहना की। उन्हें यह सम्मान शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट व उल्लेखनीय कार्य हेतु दिया गया। सम्मान ग्रहण करते हुए प्रो. डॉ. मूलचंद ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल मेरा ही नहीं, बल्कि समस्त संस्कृत अनुयायियों और हिंदी सेवकों का सामूहिक सम्मान है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उन्हें देवनागरी और संस्कृत की सेवा के लिए और अधिक ऊर्जा प्रदान करेगा। लोहिया महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मंजू शर्मा ने डॉ. मूलचंद को इस अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए बधाई देते हुये कहा कि यह सम्मान महाविद्यालय परिवार के लिए गर्व का क्षण है। आपको बता दें कि प्रो. डॉ. मूलचन्द पूर्व में भी अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मानों से विभूषित हो चुके हैं और शिक्षा के क्षेत्र में संस्कृत के प्रचार-प्रसार हेतु निरंतर प्रयासरत हैं। इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में विद्वानों ने देवनागरी लिपि के ऐतिहासिक महत्व, वैश्विक संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण व प्रसार पर गहन विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का संचालन सहज व प्रभावशाली ढंग से किया गया और यह देवनागरी भाषा-संस्कृति के उत्थान के प्रति समर्पित सभी प्रतिभागियों के लिए एक स्मरणीय व प्रेरणादायी आयोजन हुआ।

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