

चूरू। स्थानीय दादाबाड़ी में भजनलाल व लक्ष्मीनारायण पीपलवा के सौजन्य से चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में कथा के दूसरे दिन गुरूवार को कथा वाचक हरिशरण महाराज ने कथा का रसपान करवाया। इस दौरान ध्रुव चरित्र का वर्णन किया गया। हरिशरण महाराज ने कहा कि भक्ति और तपस्या से भगवान प्रसन्न होते हैं, उन्होंने कहा कि ध्रुव ने अपने पिता के राजमहल में अपने भाई के उपेक्षापूर्ण व्यवहार से दुखी होकर कठोर तपस्या की और भगवान विष्णु को प्रसन्न करके एक ऐसा स्थान प्राप्त किया जो कभी समाप्त नहीं होता। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित थे।











