टूटे मुहाने पर गुजरते रहे अफसर-जनप्रतिनिधि, हादसे का खतरा नजरअंदाज; फोटो सेशन और हरे मेट में सिमटा “जल संरक्षण” अभियान

चिड़ावा। झुंझुनूं ।अजीत जांगिड़
प्रदेश सरकार के “वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान” के तहत चिड़ावा के श्योपुरा-भोमपुरा क्षेत्र स्थित बिलावड़ी जोहड़ में आयोजित कार्यक्रम में प्रशासनिक लापरवाही और दिखावटी व्यवस्थाओं की तस्वीर खुलकर सामने आई। जल संरक्षण और जनजागरण के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा और वास्तविक व्यवस्थाओं को लेकर खड़ा हो गया, जब जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का पूरा काफिला जोहड़ के टूटे और क्षतिग्रस्त मुहाने के किनारे से गुजरता रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार यह हिस्सा कभी भी ढह सकता था, लेकिन इसके बावजूद वहां न तो सुरक्षा घेरा बनाया गया और न ही आवाजाही रोकी गई। कार्यक्रम में जिला कलेक्टर डॉ. अरूण गर्ग, जिला परिषद सीईओ परशुराम धानका, अभियान के जिला संयोजक विश्वभंर पूनिया, सह संयोजक राकेश शर्मा, कमलकांत शर्मा, भाजपा नेता राजेश दहिया, कैलाश मेघवाल, एसडीएम सुप्रिया, तहसीलदार रामकुमार पूनिया, नायब तहसीलदार बलबीर सिंह कुलहरी सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों लोगों की आवाजाही उसी क्षतिग्रस्त हिस्से से होती रही, लेकिन सुरक्षा इंतजामों का अभाव साफ नजर आया। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
स्वागत की चमक में छिपी जमीनी हकीकत
कार्यक्रम स्थल पर अतिथियों के स्वागत के लिए रंगोली सजाई गई, प्रवेश द्वार से लेकर जोहड़ तक हरा मेट बिछाया गया और पूरे आयोजन को आकर्षक बनाने का प्रयास किया गया। लेकिन दूसरी ओर जोहड़ की वास्तविक स्थिति बदहाल नजर आई। स्थानीय लोगों का कहना रहा कि यदि अभियान का उद्देश्य वास्तव में जल संरक्षण और संरचनाओं का पुनर्जीवन है, तो सबसे पहले जोहड़ के टूटे हिस्से की मरम्मत और जल संरचना को सुरक्षित करना जरूरी था।
“श्रमदान” से ज्यादा चला फोटो सेशन
अभियान के तहत सफाई और श्रमदान कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, लेकिन वहां भी व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत में अधिकारियों और अतिथियों के सामने कचरे से भरी टोकरियां रख दी गईं, जिन्हें उठाकर फोटो खिंचवाए गए। मौके पर मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा रही कि पूरा अभियान वास्तविक श्रमदान से ज्यादा औपचारिक फोटो सेशन तक सीमित दिखाई दिया।
सूखे पेड़ और पानी संकट पर भी उठे सवाल
कार्यक्रम स्थल के आसपास गर्मी से झुलसते पेड़-पौधे और क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही। जब जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग से इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त जोहड़ को सुधरवाया जाएगा और पेड़-पौधों के लिए जल व्यवस्था करवाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पिलानी विधानसभा क्षेत्र में पेयजल संकट को लेकर प्रशासन का सबसे अधिक फोकस है तथा टैंकरों के जरिए पानी सप्लाई कराया जा रहा है। यदि कहीं कमी है तो उसे भी दूर किया जाएगा।
संकल्प बड़े, लेकिन जमीन पर सवाल कायम
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली, पेड़ और कलश पूजन किया गया तथा पौधारोपण भी कराया गया। मंच से जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने के संकल्प दिलाए गए, लेकिन आयोजन स्थल की वास्तविक स्थिति और अव्यवस्थाओं ने अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल संरक्षण अभियान केवल मंचीय भाषणों, स्वागत-सत्कार और फोटो सेशन तक सीमित रहेंगे, तो धरातल पर जल संकट और जर्जर जल संरचनाओं की समस्या जस की तस बनी रहेगी। फिलहाल बिलावड़ी जोहड़ में हुआ यह आयोजन प्रशासनिक सतर्कता, सुरक्षा इंतजामों और अभियान की वास्तविक प्रभावशीलता को लेकर कई सवाल छोड़ गया है










