आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का विरोध: गैर-आईसीडीएस कार्यों और ऑनलाइन नैपकिन वितरण पर उठाए सवाल

महिला एवं बाल विकास विभाग के उप निदेशक को सौंपा ज्ञापन, अतिरिक्त कार्यों पर पारिश्रमिक और ऑफलाइन व्यवस्था बहाल करने की मांग

चूरू। अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने उड़ान योजना के तहत सेनेटरी नैपकिन वितरण और अन्य गैर-आईसीडीएस कार्यों के विरोध में महिला एवं बाल विकास विभाग के उप निदेशक तथा जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।ज्ञापन के दौरान जिलाध्यक्ष मंजू कुमारी नाई ने बताया कि आंगनबाड़ी मानदेय कर्मियों को विभाग के निर्धारित कार्यों के बदले ही मानदेय दिया जाता है, लेकिन उनसे एसआईआर सर्वे, बीएलओ ड्यूटी और अन्य गैर-आईसीडीएस कार्य भी कराए जा रहे हैं। इन अतिरिक्त कार्यों के लिए किसी प्रकार का अतिरिक्त पारिश्रमिक नहीं दिया जाता, जिससे कार्यकर्ताओं में रोष है।उन्होंने बताया कि पहले सेनेटरी नैपकिन का वितरण ऑफलाइन माध्यम से होता था, जिससे कार्य सरल और सुगम था, लेकिन अब इसे ऑनलाइन कर दिए जाने से कार्यभार काफी बढ़ गया है और इसे संचालित करना कठिन हो गया है। उन्होंने मांग की कि इस व्यवस्था को पुनः ऑफलाइन किया जाए, ताकि कार्यकर्ता आसानी से अपना कार्य कर सकें।कर्मचारियों का कहना है कि पहले से ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर अत्यधिक जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में अतिरिक्त कार्यों के कारण विभाग के मूल कार्य—जैसे शिक्षण, पोषण और बाल विकास सेवाएं—प्रभावित हो रही हैं।इस अवसर पर संजु देवी ने कहा कि आंगनबाड़ी मानदेय कर्मियों ने ऑनलाइन सेनेटरी नैपकिन वितरण कार्य का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है और इसे पुनः ऑफलाइन माध्यम से संचालित करने की मांग की है।इस मौके पर सन्तोष, सरोज, सुशीला, स्नेहलता ओझा, रेणु शर्मा, मंजू शर्मा, बरफन बानो, कमला महर्षि, मदीना बानो, जुलेखा, रेशमा, संतोष शर्मा, मन्जु स्वामी, शोभा पारीक, कमला तंवर, उषा बारुपाल, उमा देवी और आशा देवी सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।

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