काटली नदी पुनर्जीवन की गूंज: हरित पट्टिका, अतिक्रमण मुक्त धारा और सिंधु जल प्रवाह की बड़ी माँग

शेखावाटी की जीवनरेखा को बचाने के लिए जन-अभियान तेज, कलेक्टर को सौंपा विस्तृत खाका

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
शेखावाटी क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली काटली नदी के पुनर्जीवन को लेकर जनआवाज अब मजबूत होती नजर आ रही है। काटली नदी बचाओ जन अभियान के तहत नदी के दोनों तटों पर व्यापक वृक्षारोपण कर हरित पट्टिका विकसित करने, सहायक नालों और जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा नदी क्षेत्र में जल संरचनाओं के सुदृढ़ निर्माण की महत्त्वाकांक्षी माँग उठाई गई। सरस्वती रूरल एंड अरबन डेवलपमेंट सोसायटी, झुंझुनूं के नेतृत्व में अभियान संयोजक सुभाष कश्यप सहित अनेक सामाजिक, कानूनी व शिक्षाविद प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग को ज्ञापन सौंपते हुए काटली नदी के समग्र पुनर्जीवन की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की। ज्ञापन में उद्गम स्थल से लेकर विभिन्न क्षेत्रों तक नदी के संरक्षण, संवर्धन और दीर्घकालिक उपयोग की रणनीति को रेखांकित किया गया।

हरित पट्टिका से बदलेगा नदी का स्वरूप

ज्ञापन में प्रमुख रूप से नदी के दोनों किनारों पर स्थानीय जलवायु के अनुकूल, दीर्घायु वृक्षों का रोपण कर हरित पट्टिका विकसित करने की माँग की गई है, जिससे न केवल पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा, बल्कि भविष्य में अतिक्रमण की आशंकाओं पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। साथ ही नदी के सीमांकन की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने पर भी जोर दिया गया।

अतिक्रमण हटाने और जल संरचनाओं के निर्माण पर जोर

अभियानकर्ताओं ने काटली नदी के उद्गम स्थल सहित सहायक नालों व जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने की आवश्यकता पर बल देते हुए जोधपुरा सुनारी, मैनपुरा, हीरवाना और बगड़ क्षेत्र में जल सोखता बाँध (रिचार्ज स्ट्रक्चर) बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही नदी में सिंधु जल प्रवाहित करने की माँग भी प्रमुख रूप से उठाई गई, ताकि क्षेत्र में जल संकट का स्थायी समाधान संभव हो सके।

जनप्रतिनिधियों और प्रशासन तक पहुँचेगी आवाज

संयोजक सुभाष कश्यप ने बताया कि काटली नदी को पुनर्जीवित करने के इस अभियान को व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा। इसके तहत जल्द ही सीकर, झुंझुनूं और चूरू के जिला कलेक्टरों के साथ-साथ शेखावाटी क्षेत्र के सांसद— बृजेंद्र सिंह ओला, राहुल कस्वां और अमराराम को भी प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

प्रशासन ने दिया सकारात्मक संकेत

जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने नदी एक्टिविस्टों की बात को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया, जिससे अभियान को नई ऊर्जा मिली है। ज्ञापन पर महेश बसावतिया, एडवोकेट महेंद्र कुमार, सतीश मिश्रा, धर्मपाल यादव, दीपक मीणा, मदन खैरवा, धन सिंह कश्यप, विजय सिंह ओला सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर रहे। कुल मिलाकर, काटली नदी को पुनर्जीवित करने की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, बल्कि शेखावाटी क्षेत्र के जल भविष्य को सुरक्षित करने की एक मजबूत कोशिश के रूप में भी उभर रही है।