केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने झुंझुनूं में राणी सती मंदिर में किए दर्शन, महिला सशक्तिकरण पर दिया जोर

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की सराहना, आंगनबाड़ी केंद्रों के आधुनिकीकरण पर दिया बल

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
शेखावाटी दौरे पर आईं केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी यादव ने झुंझुनूं पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध राणी सती दादी मंदिर में झारखंड मूल के दिल्ली प्रवासी उद्योगपति नवल दारूका व परिवार के साथ राणी सती दादी के दर्शन कर देश-प्रदेश की खुशहाली की कामना की। झुंझुनूं पहुंचने पर मंत्री का महिला अधिकारिता विभाग के उप निदेशक विप्लव न्यौला, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. डीएन तुलस्यान, अरविंद महमिया चिड़ावा, भाजपा नेता महेश बसावतिया और राणी सती मंदिर ट्रस्ट के सहायक प्रशासनिक अधिकारी विपुल छक्कड़ सहित अन्य लोगों ने स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने झुंझुनूं जिले में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान और महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए सरकार और समाज दोनों की भागीदारी जरूरी है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि देश में लगभग 14 लाख आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत दो लाख आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों में बेहतर भवन और रखरखाव, स्वच्छ पेयजल व शौचालय, पोषण वाटिका, एलईडी स्क्रीन व इंटरनेट सुविधा के साथ—साथ पोषण के साथ प्रारंभिक शिक्षा जैसी सुविधाओं से लैस होंगे और देशभर में मॉडल केंद्र बनेंगे। मंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक शोध के अनुसार 6 वर्ष तक के बच्चों का 85 प्रतिशत मस्तिष्क विकास हो जाता है। इसलिए इस उम्र में पोषण और शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चे देश का भविष्य हैं और विकसित भारत के निर्माण में उनकी अहम भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को स्कूल परिसरों में संचालित करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे छोटे बच्चों को शुरुआती शिक्षा के साथ स्कूल वातावरण से जोड़ने में मदद मिलेगी और आगे की पढ़ाई में आसानी होगी। मंत्री ने कहा कि सरकार महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए निरंतर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सखी निवास, स्वाधार गृह जैसी योजनाएं संचालित हैं। महिलाओं के प्रति समाज की सोच में बदलाव जरूरी है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं, ताकि किसी भी महिला को आश्रय गृहों में जाने की आवश्यकता ही न पड़े।

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