मंड़ावा में गैर जुलूस बना जनसैलाब का ऐतिहासिक दृश्य
मंड़ावा। झुंझुनू । अजीत जांगिड़
रंगों के महापर्व होली पर मंड़ावा ने इस वर्ष सामाजिक समरसता, राजनीतिक सौहार्द और सांस्कृतिक गौरव का ऐसा अद्भुत दृश्य देखा, जिसने पूरे क्षेत्र को उत्साह और उल्लास से सराबोर कर दिया। नगरपालिका मंड़ावा के पास से निकला पारंपरिक गैर जुलूस जब मुख्य मार्गों से गुजरा, तो हर ओर रंगों की बौछार, ढोल-नगाड़ों की गूंज और “होली है” के जोशीले स्वर वातावरण में गूंज उठे। गैर जुलूस में उमड़ा जनसैलाब इस बात का साक्षी बना कि होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का अवसर है। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग—सभी वर्गों की सहभागिता ने इसे जनउत्सव का रूप दे दिया। गुलाल से रंगे चेहरे और उमंग से भरे कदम मंड़ावा की गलियों को जीवंत चित्र में बदलते नजर आए। इस भव्य आयोजन में झुंझुनूं से भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी महेश बसावतिया, झुंझुनूं नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष पवन पुजारी, प्रमुख व्यवसायी देवेंद्र खत्री, संजय शर्मा एवं विनोद शर्मा सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और सामाजिक एकता का सशक्त संदेश दिया। मंड़ावा का गैर जुलूस वर्षों पुरानी परंपरा का प्रतीक है, लेकिन इस बार इसकी भव्यता और जनसहभागिता ने इसे ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान कर दिया। लोकधुनों पर थिरकते युवाओं की टोली, पारंपरिक वेशभूषा में सजे प्रतिभागी और अनुशासित व्यवस्थाएं—हर पहलू आयोजन की गरिमा को बढ़ाता नजर आया। राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व की एक साथ मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि त्योहार समाज को जोड़ने की ताकत रखते हैं। यहां रंगों ने भेदभाव की हर रेखा मिटाकर केवल प्रेम, विश्वास और अपनत्व का संदेश दिया। रंगों में भीगा यह गैर जुलूस केवल एक परंपरागत आयोजन नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता और जनएकता का जीवंत दस्तावेज बन गया। मंड़ावा की धरती पर उमड़ा यह जनसैलाब लंबे समय तक भाईचारे, प्रेम और सौहार्द की प्रेरणा देता रहेगा। होली के रंगों में रची-बसी यह तस्वीर बता गई कि जब समाज एकजुट होता है, तो उत्सव इतिहास बन जाते हैं।















