सर्वोच्च न्यायालय से लेकर विश्वविद्यालयों तक कट्टरपंथ की घुसपैठ पर डॉ. अंबेडकर संगठन सख्त

राष्ट्रपति, राज्यपाल व मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंप कर धार्मिक उन्माद फैलाने वाले संगठनों पर रोक और गिरफ्तार छात्रों की रिहाई की मांग

हनुमानगढ़ । हिमांशु मिढ्ढा
देश में न्यायपालिका से लेकर शिक्षा संस्थानों तक कट्टरपंथ, धार्मिक उन्माद और जातिगत अहंकार के बढ़ते प्रभाव को लेकर डॉ. अंबेडकर अनुसूचित जाति अधिकारी कर्मचारी संगठन ने राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने मांग की है कि हिंदुत्व के नाम पर नफरत और असहिष्णुता फैलाने वाले संगठनों पर तत्काल रोक लगाई जाए, विश्वविद्यालयों को कट्टरपंथ की घुसपैठ से मुक्त रखा जाए और लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने वाले छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए।जिला अध्यक्ष सुमेर सिंह के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में संगठन ने कहा कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में एक अधिवक्ता द्वारा मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की गई और “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे लगाए गए। यह केवल एक व्यक्ति की हरकत नहीं बल्कि उस विचारधारा का परिणाम है जो धर्म के नाम पर हिंसा और नफरत को सामान्य बना रही है। संगठन ने इसे भारतीय न्यायपालिका ही नहीं बल्कि पूरे गणराज्य की आत्मा पर हमला बताया।ज्ञापन में कहा गया कि आज कुछ संगठनों द्वारा कांवड़ यात्राओं, धार्मिक जुलूसों और सामाजिक आयोजनों में हुड़दंग, तोड़फोड़, धमकियों और सार्वजनिक उपद्रव की घटनाएं बढ़ी हैं। दलितों, अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों पर अत्याचार को धार्मिक भावनाओं की आड़ में वैधता दी जा रही है। यदि इस उन्माद को समय रहते नहीं रोका गया तो कल यही हमला संविधान, स्वतंत्रता और समता पर होगा।इसी क्रम में राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में संगठन ने 30 सितम्बर को राजस्थान विश्वविद्यालय में कट्टरपंथी संगठनों द्वारा आयोजित शस्त्र पूजन व धार्मिक-राजनीतिक आयोजन का उल्लेख किया। संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान, संवाद और बहुलवाद के केंद्र होते हैं, परंतु उन्हें कट्टर विचारधाराओं का मंच बना देना लोकतांत्रिक और शैक्षणिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा है।इस कार्यक्रम का विरोध करने वाले छात्र नेताओं और अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों को हिरासत में लेकर लाठीचार्ज किया गया। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद जाखड़ सहित कई छात्रों की गिरफ्तारी को संगठन ने लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने का प्रयास बताया। संगठन ने मांग की कि इन छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए और प्रकरणों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए।संगठन ने कहा कि धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वाली विचारधारा राष्ट्र के लिए आत्मघाती है, और यदि इसे नहीं रोका गया तो यह संविधान और लोकतंत्र दोनों को क्षति पहुँचाएगी। संगठन ने राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि धार्मिक उन्माद फैलाने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाए जाएं और शिक्षा संस्थानों को कट्टरपंथी प्रभाव से मुक्त रखा जाए। इस मौके पर मोहनलाल, दौलतराम कालवा, डॉ ओमप्रकाश मोसलपुरिया, ईश्वर सिंह, नत्थूराम, अमीचंद साव, जागेराम, बेगराज चालिया व अन्य सदस्य मौजूद थे।

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