रंग लाई चूरू कलक्टर की मॉनीटरिंग, अभियान का मिला पूरा लाभ

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जिला कलक्टर साँवर मल वर्मा ने किया करीब 60 शिविरों का निरीक्षण, एक-एक चीज को बारीकी से किया मॉनीटर

चूरू। प्रशासन गांवों के संग अभियान की शुरुआत भले ही जिले में शिथिल रही हो, जिला कलक्टर साँवर मल वर्मा की नियमित और सघन मॉनीटरिंग के बाद अभियान संपन्न होते-होते जिले की स्थिति में खासा सुधार आया है और आमजन को लाभान्वित करने में जिला सूबे के टॉप जिलों में शुमार हो गया है। जानकारी के मुताबिक, राज्य स्तर से हुए पहली समीक्षा में जिले की लचर स्थिति सामने आने के बाद जिला कलक्टर ने लगातार फील्ड विजिट कर अभियान की मॉनीटरिंग शुरू की और इसके लिए उन्हें अधिकारियों-कर्मचारियों की खिंचाई भी करनी पड़ी लेकिन जिला कलक्टर ने शिविरों में खुद घंटों-घंटों तक बैठे रहकर लोगों के काम करवाए और राज्य सरकार की मंशा के अनुसार लोगों को अभियान का लाभ दिलाया। यही वजह रही कि जब मुख्यमंत्रा अशोक गहलोत स्वयं कातर आए तो यहां की व्यवस्थाओं के लिए जिला कलक्टर साँवर मल वर्मा की सराहना की। ।
अभियान से जुड़ी उपलब्धियों पर नजर डालें तो न केवल राजस्व अपितु दूसरे विभागों की प्रगति भी बेहतरीन रही है और जिला कलक्टर की मॉनीटरिंग का भरपूर लाभ मिला है। जिला कलक्टर ने अपने स्तर पर विभागों की ब्लॉकवार रैंकिंग जारी की, जिससे अधिकारियों में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा हुई और स्थिति में सुधार आया। इसके अलावा प्रत्येक शिविर में जाने के बाद मिली कमियों पर विस्तृत रिपोर्ट बनाकर संबंधित अधिकारियों को भेजी, जिसका लाभ आमजन को मिला। जो काम तकनीकी कारणों से संभव नहीं थे, उनके संबंध में भी जिला कलक्टर ने सभी उपखंड अधिकारियों से प्रकरण लंबित नहीं होने के प्रमाण पत्रा मांगे, जिससे मॉनीटरिंग संभव हुई। ताजा स्थिति के अनुसार जिले में गैर खातेदारी से खातेदारी का प्रकरण एक भी लंबित नहीं है। आबादी विस्तार के लिए भी जमीन उपलब्ध नहीं है। प्रतिबंधित किस्म की जमीनों पर आबादी विस्तार किया जाना संभव नहीं है। सार्वजनिक प्रयोजनार्थ भी जमीन उपलब्ध नहीं है, बाकी होने लायक कोई काम पेंडिंग नहीं है।
जिला कलक्टर ने इस दौरान करीब 60 शिविरों का निरीक्षण किया और एक-एक चीज की बारीकी से मॉनीटरिंग की। जिला कलक्टर जिस भी शिविर में जाकर बैठे, जिला कलक्टर की कार्यशैली और संवेदनशीलता से ग्रामीणजन खुश नजर आए। इस दौरान कई गांव तो ऐसे थे, जहां पहली बार किसी कलक्टर के कदम पड़े थे। ऐसे में उन ग्रामीणों में शासन और प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा और एक उम्मीद जगी। सूत्रों के अनुसार प्रशासन गांवों के स्तर अभियान के बाद अब जिला कलक्टर का ध्यान प्रशासन शहरों के संग शिविरों पर रहेगा और उनकी कार्यशैली को देखते हुए यह समझा जा सकता है कि शहरों के लोगों को शिविरों का अधिक से अधिक लाभ मिलना संभव हो सकेगा।

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