मलेरिया, डेंगू व स्वाइन फ्लू की जानकारी छुपा नहीं पाएंगे निजी स्वास्थ्य केंद्र

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भारतीय दण्ड संहिता के तहत होगी कार्रवाई, घर में मिला लार्वा तो भी लग सकता है जुर्माना
हनुमानगढ़। खाली मटकों व टायरों में रखे पानी की सफाई रखने, कूलर में पानी की नियमित सफाई करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब तक आमजन को जागरूक करने में जुटा था, लेकिन अब लापरवाही बरतने वालों पर जुर्माना भी लग सकेगा। राज्य सरकार ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है जिसके बाद डेंगू, मलेरिया व स्वाइन फ्लू को सूचिबद्ध बीमारियों (नोटिफायेबल डिजीज) में शामिल कर लिया है। इसके साथ ही अब ऐसी बीमारियां गैर सरकारी चिकित्सा संस्थान, क्लिनिक व लैब में चिन्हित होने पर इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देना जरूरी होगा। यह सूचना तुरंत देनी होगी, अन्यथा आईपीसी के तहत जुर्माना लगाया जा सकेगा।  सीएमएचओ डॉ. अरूण कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने राजस्थान एपिडेमिक अधिनियम 1957 के तहत डेंगू, मलेरिया व स्वाइन फ्लू को राज्य सरकार ने अधिसूचित कर नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अब यदि लैब, क्लिनिक या चिकित्सालय प्रबंधक ये बीमारियां चिन्हित होने पर इसकी सूचना विभाग को नहीं देते हैं, तो आईपीसी की धारा 181 के तहत पांच सौ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। बीमारी की पुष्टि केवल एलाइजा किट से ही मानी जाएगी और इसके लिए निजी केंद्र ब्लड सैंपल चिकित्सालय में भेजेंगे। मलेरिया व डेंगू की जांच के लिए भारत सरकार की गाइडलाइन की पालना सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। अब कोई भी लैब संचालक या चिकित्सा संस्थान किसी कार्ड आदि से जांच कर बीमारी की पुष्टि नहीं कर सकेगा। यही नहीं अब विभाग निरीक्षण अधिकारी के नेतृत्व में टीमें गठित कर किसी भी परिसर में प्रवेश कर फीवर सर्विलेंस, एंटीलार्वल गतिविधियों और इन बीमारियों की रोकथाम के लिए दवा छिडकाव कर सकेंगे। संभावित रोगी की ब्लड स्लाइड, घर में पानी इकठ्ठा मिलने पर एंटीलार्वल गतिविधियां कर सकेगा। उन्होंने बताया कि सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को पाबंद किया गया है कि वे भी नियमित एंटीलार्वल गतिविधियां गंभीरता से करें। किसी भी तरह की लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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