एनजीटी आदेश की पालना के लिए प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

 सिंधु जल लाकर काटली के पुनर्जीवन की भी उठी आवाज, काटली नदी बचाओ अभियान का बिगुल: जल स्रोतों के सीमांकन और अतिक्रमण हटाने की बड़ी मांग

उदयपुरवाटी। झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
काटली नदी और उसके सहायक जल स्रोतों को बचाने के लिए अब जनआंदोलन तेज हो गया है। काटली नदी बचाओ जन अभियान के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने उपखण्ड अधिकारी और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर नदी, नालों और जल स्रोतों के सीमांकन, अतिक्रमण हटाने और संरक्षण की जोरदार मांग उठाई है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के 7 अप्रैल के आदेश के अनुपालन को लेकर की गई, जिसमें जल स्रोतों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। अभियान संयोजक सुभाष कश्यप के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में साफ कहा गया कि उदयपुरवाटी क्षेत्र में काटली नदी के सहायक जल स्रोत— सुकली नदी, जहाज मावता, मोजिडा नाला, सांका वाला नाला, जोधपुरा नाला, सोकली नदी सराय, सटिण्डा नाला सहित कई स्रोत—अतिक्रमण और उपेक्षा के कारण संकट में हैं।ज्ञापन में मांग की गई कि इन सभी जल स्रोतों का तत्काल सीमांकन कर अतिक्रमण हटाया जाए और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों को दुरुस्त किया जाए, ताकि क्षेत्र में जल संकट को रोका जा सके।

प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश देने की मांग

ज्ञापन में प्रशासन से आग्रह किया गया कि सभी पटवारियों को निर्देशित कर जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट तैयार करवाई जाए अवैध कब्जों की पहचान कर तुरंत कार्रवाई की जाए इस दौरान बड़ी संख्या में बुद्धिजीवियों, अधिवक्ताओं और ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर इस मांग को जनसमर्थन दिया।

सिंधु जल से काटली का पुनर्जीवन’—बड़ा विजन

अभियान ने केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि काटली नदी के पुनर्जीवन का बड़ा विजन भी रखा है। ज्ञापन में मांग की गई कि सिंधु नदी का जल काटली में लाया जाए और नदी के समग्र विकास, संरक्षण और प्रभावितों के पुनर्वास की योजना बनाई जाए I अभियान संयोजक सुभाष कश्यप ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा और जल्द ही प्रधानमंत्री से मुलाकात कर मांग रखी जाएगी। ज्ञापन के दौरान सतीश मिश्रा, धर्मवीर यादव, दीपक मीणा, करण तेतरवाल, धन सिंह कश्यप, मोहर सिंह, हरलाल सैनी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, जिन्होंने काटली नदी बचाने के इस अभियान को जनआंदोलन का रूप देने का संकल्प लिया। काटली अब सिर्फ नदी नहीं, बल्कि क्षेत्र के अस्तित्व की लड़ाई बन गई है—और इस बार जनता आर-पार के मूड में नजर आ रही है।