सरस्वती पूजन से शुरुआत, संतों के प्रवचनों व क्रीड़ा प्रतियोगिताओं से गूंजा परिसर
चूरू। सेठ जयदयाल गोयनका द्वारा स्थापित एवं गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा संचालित श्री ऋषिकुल ब्रह्मचर्याश्रम महाविद्यालय (केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से सम्बद्ध) में द्वि-दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती पूजन के साथ हुआ। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना और स्वागत गीत ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।प्रथम सत्र में “भारतीय ज्ञान प्रणाली” विषय पर चौतन्य जी महाराज ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भारतीय परंपराओं और प्राचीन विद्याओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में निहित ज्ञान आज भी जीवन को दिशा देने में सक्षम है।द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता स्वदेश स्वरूपदास जी महाराज ने रामायण एवं महाभारत के प्रसंगों के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन दर्शन समझाया। उन्होंने गुरुकुल परंपरा पर बल देते हुए एकलव्य की कथा के जरिए गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि महाकाव्यों के पात्र विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।सत्र के अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य ने महाराज का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया तथा संस्थान की ओर से उनका सम्मान किया गया।कार्यक्रम के तृतीय सत्र में पूर्व स्नातकों एवं वर्तमान ब्रह्मचारियों के बीच विभिन्न क्रीड़ा प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। खेल मैदान में अनुभव और युवा ऊर्जा का अनूठा संगम देखने को मिला। सभी प्रतिभागियों ने खेल भावना के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे पूरा परिसर हर्षोल्लास से गूंज उठा।कार्यक्रम ने न केवल नए विद्यार्थियों का स्वागत किया, बल्कि पूर्व छात्रों के जुड़ाव से यह आयोजन एक पारिवारिक उत्सव का रूप लेता नजर आया। द्वितीय दिवस पर भी विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे।
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