धरने पर ‘डंक’ का कहर: न्याय मांग रहे किसानों पर मधुमक्खियों का हमला

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सरसों की जली फसल के विरोध में बैठे थे किसान, अचानक हमले से मची भगदड़ — कई घायल, बुजुर्गों की हालत बिगड़ी

मलसीसर । झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
न्याय की गुहार लगा रहे किसानों का शांतिपूर्ण धरना उस वक्त अफरा-तफरी में बदल गया, जब प्रदर्शन स्थल पर अचानक मधुमक्खियों ने हमला बोल दिया। अलसीसर गांव में सरसों की तैयार फसल को आग के हवाले किए जाने के विरोध में किसान मलसीसर तहसील कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे। तभी पास के पेड़ पर बने छत्ते से निकली मधुमक्खियों ने सैकड़ों किसानों को निशाना बना लिया। देखते ही देखते पूरा धरना स्थल चीख-पुकार और भगदड़ में तब्दील हो गया। जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे। मधुमक्खियों के डंक से कई किसान और बुजुर्ग घायल हो गए, वहीं कुछ की हालत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाना पड़ा। मधुमक्खियों के अचानक हमले में घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

फसल जलाने से आक्रोश, न्याय की मांग पर बैठे थे किसान

अलसीसर गांव के एक किसान की सालभर की मेहनत — सरसों की तैयार फसल — को असामाजिक तत्वों द्वारा आग लगाकर राख कर दिया गया था। इस घटना से गुस्साए किसान ने दोषियों की गिरफ्तारी और पीड़ित को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर धरना दे रहे थे। धरने में आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में किसान, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हुई थीं।

मधुमक्खियों का अचानक हमला, मच गया हड़कंप

धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था, लेकिन अचानक पास के पेड़ पर लगे मधुमक्खियों के छत्ते से हजारों मक्खियां निकलकर प्रदर्शनकारियों पर टूट पड़ीं। हमला इतना तेज था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। लोग अपनी जान बचाने के लिए भागते नजर आए, जिससे मौके पर अराजक स्थिति बन गई।

बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर, कई अस्पताल में भर्ती

मधुमक्खियों के डंक का सबसे ज्यादा असर बुजुर्ग किसानों पर पड़ा। कई लोगों को शरीर पर कई-कई डंक लगे, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। घायलों को तत्काल निजी वाहनों और एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

राजकुमार बने ‘मसीहा’, दिखाई बहादुरी

इस अफरा-तफरी के बीच अलसीसर निवासी राजकुमार ने साहस और मानवता की मिसाल पेश की। उन्होंने खतरे की परवाह किए बिना मौके पर फंसे 2-3 बुजुर्ग किसानों को सुरक्षित बाहर निकाला और खुद आगे बढ़कर घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करवाई।

दोहरी मार झेल रहे किसान

एक ओर जहां किसानों की मेहनत की फसल जलाकर राख कर दी गई, वहीं दूसरी ओर न्याय मांगने पहुंचे किसानों को मधुमक्खियों के हमले का सामना करना पड़ा। यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाती है, बल्कि किसानों की पीड़ा और असुरक्षा को भी उजागर करती है।

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