चूरू। लोक संस्कृति शोध संस्थान नगर श्री में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। सचिव श्याम सुन्दर शर्मा ने बताया कि हर माह के अंतिम रविवार को होने वाली पं. कुंज विहारी शर्मा स्मृति साहित्य गोष्ठी की 181वीं कड़ी में काव्य कलश का आयोजन हुआ। अनन्तराम सोनी, एडवोकेट की अध्यक्षता व संगीतज्ञ डॉ. श्यामसुन्दर शर्मा के विशिष्ट सान्निध्य में सम्पन्न हुई। गोष्ठी का आगाज मंगल व्यास भारती की सरस्वती वंदना सदा करें हम ध्यान शारदे…, अपना हिन्दुस्तान रहा हमको प्यारा से हुआ। पिंटू शर्मा भारतीय की कविता-मायड़ थारा वीर घणा आठै…, नील गगन किस काम का…, साकिर खान ने सोचने से मेरा काम बन जाता तो मैं भी राम बन जाता…, जंग में ऐसे भी मरते हैं जिन की खता नहीं होती…, प्यार में हरबार हम ही क्यों झुके…ने खूब समां बांधा। अब्दुल मन्नान ‘मजहर’ ने आओ मिलकर करें हिफाजत भारत के संविधान की…, लाखां सलाम देश के उस जवान पर वारी है जिसने जान देश पर…, नहीं मय कोई कहने में किंचित…, गजल ये रहे अलम तकरार से बेहतर होता है…, दीपक कामिल ने ख्वाजा, नानक, राम है गंगा जमुना नीर…, मिलने का सहारा है वरना…, कश्मसाति तड़फड़ाती जिन्दगी के साथ है…..जख्म देने वाले चांद से आते नहीं… इमरान अहमद ने ये दिल तो क्या जान है चूरू…, कमल सिंह कोठारी ने आज मौन तू मुंह खोल…, एक बार जयकारा बोल क्षणिकाएं लहू से लिखी जाती है। ये बलिदान की कहानियां ने खूब दाद पाई। शेर सिंह ने कविता-कुर्बान हुए जो खातिर वतन के…, जयरन्त लखेरा ने गलत भी कहते हो सही भी कहते हो…. इक तेरा शहर है इक मेरा गांव है… सुनाई। डॉ. श्यामसुन्दर शर्मा ने राग वसन्त में फूल खिले नवल गेंदा की डार व बढ़े चलो जवान तुम बढ़े चलो.., अध्यक्ष अनन्तराम सोनी ने काव्य गोष्ठी की सांगोपांग समीक्षा की तथा अपनी कविता युग मुक्त कंठ से कहे मैं भी बदल गया…. सुनाई। कार्यक्रम का संचालन प्रो. कमल सिंह कोठारी ने किया।
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