झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
विश्व हिंदू परिषद् एवं बजरंग दल झुंझुनूं द्वारा गांधी चौक ताल बाजार में बजरंग दल जिला संयोजक सुशील प्रजापति के नेतृत्व में अखंड भारत का चित्र बनाकर अखंड भारत दिवस मनाया गया। सुशील प्रजापति ने बताया कि महाभारत काल के बाद से भी समझे तो ध्यान में आता है कि उस समय भी सिर्फ इस भू भाग पर सिर्फ हिंदू ही रहता था और संपूर्ण पृथ्वी का जब जल और थल इन दो तत्वों में वर्गीकरण करते है। तब सात द्वीप एवं सात महासमुद्र माने जाते हैं। हम इसमें से प्राचीन नाम जंबूद्वीप जिसे आज एशिया द्वीप कहते हैं तथा हिंदू सरोवरम् जिसे आज हिंदू महासागर कहते हैं, के निवासी हैं। इस जम्बूद्वीप (एशिया) के लगभग मध्य में हिमालय पर्वत स्थित हैं। हिमालय पर्वत में विश्व की सर्वाधिक ऊँची चोटी सागरमाथा, गौरीशंकर हैं। जिसे 1835 में अंग्रेज शासकों ने एवरेस्ट नाम देकर इसकी प्राचीनता व पहचान को बदलने का कूटनीतिक षड़यंत्र रचा। इसका एकमेव मार्ग है संगठित, सशक्त, आक्रामक राष्ट्रभक्त और सक्रिय हिन्दू समाज निर्माण करना है। देश में राष्ट्रीय अखंडता, सहिष्णुता की एकमेव गारंटी हिन्दू है और भारत में संविधान जिंदा है तो केवल हिन्दू के कारण है। हम स्वातंत्र्य समर के हुतात्माओं के साथ साथ अपनी मातृभूमि के उस भाग का भी स्मरण कर, उसे नमन करें जो 14 अगस्त को 1947 से हमारे लिए पराया हो गया है। पर्दाफाश करें देश के बंटवारे के अपराधी तथा विश्वासघाती विचारधारा के पोषकतत्वों का जिससे आगे के काल में ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। प्रांत परियोजना सह प्रमुख योगेन्द्र कुंडलवाल ने अखंड भारत के 14वीं-15वीं शताब्दी में चंपा कंबोडिया, 1800 में जावा, थाईलैंड, इंडोनेशिया, 1876 में अफगानिस्थान गंधार, 1904 में नेपाल, 1906 में भूटान, 1914 में तिब्बत, 1935 में श्रीलंका, 1937 में बर्मा, 1947 में पाकिस्तान एवं बांग्लादेश धर्म के नाम पर अलग हो गए। अब हिंदुओं को जाति एवं भाषा के नाम पर बांटकर भारत को तोड़ने की साजिश रची जा रही है। इस मौके पर जिला विधि प्रमुख पंकज बावलिया, बजरंग दल जिला सुरक्षा प्रमुख पिंटू कुमावत, बालोपासना प्रमुख विनय कुमावत, नगर अध्यक्ष अशोक सैनी, नगर संयोजक प्रवीण शर्मा, सेवा प्रमुख श्यामसुंदर पाटोदिया, मिलन केंद्र प्रमुख सोनू कुमावत, निवर्तमान पार्षद अशोक प्रजापति, निवर्तमान पार्षद विनोद जांगिड़, रोहन सैनी, मुकेश शर्मा, मोनू भार्गव, नरेंद्र कुमावत, मनीष दाधीच, सुनिल मोरवाल, अनिल चांवरिया, दिनेश योगी, देवकीनंदन वर्मा, दीपक कुमावत, हरिश योगी, वैभव, मोहित योगी, सोनू कुमावत, अर्जुन, लोकेश योगी, सज्जन सैनी, बंटी सैनी, भवानी सैनी आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।