कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा: बोलीं— बच्चों को पढ़ाएं या मोबाइल पर डेटा भरें? ‘उड़ान योजना’ बना तनाव की वजह
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सब्र आखिरकार टूट गया। अपनी मांगों को लेकर सैकड़ों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आईं और कलेक्टर कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर और महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक को ज्ञापन सौंपा। कार्यकर्ताओं ने साफ शब्दों में कहा— “हमसे 4 घंटे की ड्यूटी तय है, लेकिन काम 8-10 घंटे का लिया जा रहा है। अब हालत ये है कि हम बच्चों को पढ़ाएं या दिनभर ऑनलाइन सर्वे करें?” लगातार बढ़ते काम के दबाव के कारण कार्यकर्ताओं ने मानसिक तनाव में होने की बात भी खुलकर कही।
‘पाठशाला’ छूटी, मोबाइल बना काम का केंद्र
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनका मूल काम बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा और पोषण देना है, लेकिन अब वे पूरी तरह ऑनलाइन कार्यों में उलझ गई हैं। पोषण ट्रैकर में बच्चों का वजन, लंबाई और पोषाहार की एंट्री , प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई ) के ऑनलाइन फॉर्म , लगातार सर्वे और डेटा अपडेट करना इन सबके कारण बच्चों की ‘प्री-स्कूल शिक्षा’ प्रभावित हो रही है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि “मोबाइल ने हमारी पाठशाला छीन ली है।”
‘उड़ान योजना’ बनी सबसे बड़ा विवाद
सबसे ज्यादा नाराजगी ‘उड़ान योजना’ (सेनेटरी नेपकिन वितरण) को लेकर देखने को मिली। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि— हर घर सर्वे का दबाव , लाभार्थियों का पंजीकरण और सबसे कठिन फेस वेरिफिकेशन इन सभी कार्यों ने उनकी जिम्मेदारी कई गुना बढ़ा दी है। कार्यकर्ताओं ने कहा “हमारा काम बच्चों की देखभाल है, न कि हर घर जाकर सर्वे करना और ऑनलाइन वेरिफिकेशन करना । शहरों में स्थिति और गंभीर बताई गई, जहां एक कार्यकर्ता को 2 से 3 वार्डों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इससे काम का दबाव और बढ़ गया है।
मुख्य मांगे
उड़ान योजना से मुक्ति: सेनेटरी नेपकिन वितरण व सर्वे का कार्य संबंधित विभाग को सौंपा जाए , ऑनलाइन कार्यों में कटौती: केवल जरूरी डेटा ही ऑनलाइन लिया जाए , कार्यक्षेत्र का निर्धारण: वार्डों के अनुसार कार्यभार कम किया जाए I कार्यकर्ताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।










