100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ

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झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा देश को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति से मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिले में निरंतर जनजागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में सहायक निदेशक अरविंद कुमार ओला के निर्देशानुसार झुंझुनूं जिले के चिड़ावा स्थित एक निजी स्कूल में बाल विवाह रोकथाम विषयक जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों तथा इससे संबंधित सहायता सेवाओं की जानकारी प्रदान करना था। ताकि समाज के सभी वर्ग मिलकर इस सामाजिक बुराई के उन्मूलन में सक्रिय भूमिका निभा सकें। इस अवसर पर चाइल्ड हेल्पलाइन काउंसलर अरविंद कुमार, चाइल्ड हेल्पलाइन के केस वर्कर नरेन्द्र सिंह भाटी, बाल अधिकारिता विभाग की आउटरीच वर्कर पूनम जांगिड़ एवं चाइल्ड लाइन के परियोजना समन्वयक महेश कुमार मांजू उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यालय प्रशासन, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। परियोजना समन्वयक महेश कुमार मांजू ने अपने संबोधन में बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित 100 दिवसीय विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत को बाल विवाह मुक्त राष्ट्र बनाना है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह न केवल बालकों और बालिकाओं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, बल्कि यह उनके शिक्षा, कॅरिअर और आत्मनिर्भरता के अवसरों को भी सीमित कर देता है। बाल विवाह से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में वृद्धि, कुपोषण, घरेलू हिंसा और आर्थिक निर्भरता जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है। कानून के अनुसार बालिका की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष तथा बालक की 21 वर्ष निर्धारित की गई है। किसी भी प्रकार से बाल विवाह करवाना, उसमें सहयोग देना या उसे प्रोत्साहित करना कानूनन अपराध है। जिसके लिए कारावास एवं जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए समाज के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह इस कुरीति का विरोध करे और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दे। कार्यक्रम के दौरान चाइल्ड लाइन के काउंसलर अरविन्द कुमार ने विद्यार्थियों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1098 एक राष्ट्रीय आपातकालीन टोल-फ्री हेल्पलाइन है। जिस पर कोई भी व्यक्ति बाल अधिकारों के उल्लंघन, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल शोषण या अन्य किसी संकटग्रस्त बच्चे के संबंध में सूचना दे सकता है। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहती है और गोपनीयता बनाए रखी जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि यदि उनके आसपास कहीं भी बाल विवाह की आशंका हो तो वे तुरंत 1098 पर सूचना दें। केस वर्कर नरेन्द्र सिंह भाटी ने बाल विवाह के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कम आयु में विवाह होने से बच्चों का बचपन छिन जाता है। वे शिक्षा से वंचित हो जाते हैं और जीवन की जिम्मेदारियों का बोझ समय से पहले उठाने को मजबूर हो जाते हैं। विशेष रूप से बालिकाओं को स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं, कुपोषण और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता से ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। आउटरिच वर्कर पूनम जांगिड़ ने बाल अधिकारों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समान अवसरों का अधिकार है। बाल विवाह इन सभी अधिकारों का हनन करता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने तथा समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक सत्र भी आयोजित किया गया। जिसमें उन्होंने बाल विवाह से संबंधित प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों ने उनके समाधान प्रस्तुत किए। पोस्टर एवं स्लोगन के माध्यम से भी जागरूकता संदेश दिए गए। विद्यार्थियों ने बाल विवाह के विरोध में शपथ ली और यह संकल्प व्यक्त किया कि वे स्वयं भी बाल विवाह नहीं करेंगे और न ही अपने आसपास होने देंगे। विद्यालय प्रशासन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना विकसित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों के लिए विद्यालय सदैव सहयोग करेगा। उल्लेखनीय है कि 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत झुंझुनूं जिले में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की टीम द्वारा समय-समय पर शैक्षणिक संस्थानों, कोचिंग संस्थानों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं वैवाहिक स्थलों पर जाकर जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अभियान का उद्देश्य न केवल बाल विवाह की घटनाओं को रोकना है, बल्कि समाज में दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन लाना भी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित और सशक्त वातावरण में विकसित हो सकें। अंत में अधिकारियों ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई के उन्मूलन में सक्रिय भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराएं। सामूहिक प्रयासों से ही बाल विवाह मुक्त भारत का सपना साकार किया जा सकता है।

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