52 वर्ष की उम्र में झुंझुनूं के पूर्व सैनिक बने मैराथन धावक, लद्दाख और जैसलमेर अल्ट्रा रेस पर नजर

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बुहाना ।झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
संकल्प और अनुशासन की प्रेरणादायक मिसाल पेश करते हुए सागा गांव के सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर किरोड़ीमल ने साबित कर दिया है कि उम्र सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। 52 वर्ष की आयु में वर्ष 2025 में अपने एथलेटिक कॅरिअर की शुरुआत करने के मात्र आठ महीनों के भीतर उन्होंने 42.195 किलोमीटर की फुल मैराथन चार घंटे 25 मिनट में पूरी कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। करीब 30 वर्षों तक भारतीय सेना में सेवा देने के बाद वर्ष 2021 में सेवानिवृत्त हुए सूबेदार मेजर किरोड़ीमल ने रिटायरमेंट के बाद विश्राम का मार्ग नहीं चुना। उन्होंने स्वयं को सामाजिक कार्यों में समर्पित करते हुए भारतीय सशस्त्र बलों में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को प्रशिक्षण व मार्गदर्शन देना शुरू किया। अनुशासन और फिटनेस के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सेवानिवृत्ति के बाद भी बरकरार है। उनकी उपलब्धि इसलिए भी विशेष है। क्योंकि जहां कई युवा पांच किलोमीटर की दौड़ में ही कठिनाई महसूस करते हैं। वहीं उन्होंने अपने एथेलेटिक सफर की शुरुआत के कुछ ही महीनों में 42.195 किलोमीटर की कठिन मैराथन पूरी कर ली। अब सूबेदार मेजर किरोड़ीमल ने और बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। वे प्रतिष्ठित लद्दाख मैराथन की 42.195 किलोमीटर की ऊंचाई वाली दौड़ में भाग लेने के साथ-साथ राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में आयोजित होने वाली जैसलमेर बॉर्डर 50 किलोमीटर अल्ट्रा मैराथन में भी हिस्सा लेने का संकल्प ले चुके हैं। उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और साहस के बल पर किसी भी उम्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए जा सकते हैं। जिन युवाओं को वे प्रशिक्षित कर रहे हैं और जिस समाज का वे प्रतिनिधित्व करते हैं, उनके लिए वे प्रेरणा, धैर्य और राष्ट्र गौरव का जीवंत उदाहरण बन चुके हैं।

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