पारंपरिक फाग गीतों की रसधार, प्रतिभाओं का सम्मान; लोक विरासत को संजोने का दिया संदेश
चूरू। रंग, उमंग और लोक परंपराओं की जीवंत छटा के बीच रविवार शाम सफेद घंटाघर पर साकार संस्थान की ओर से आयोजित फागोत्सव–2026 ने शहरवासियों को लोक संस्कृति से सराबोर कर दिया। रतनलाल पारख की स्मृति में बसंत कुमार व संजय कुमार पारख (कोलकाता) के सौजन्य से हुए इस आयोजन ने चूरू की सांस्कृतिक विरासत को फिर से जीवंत कर दिया।राजलदेसर की श्याम म्यूजिकल ग्रुप चंग पार्टी के कलाकारों ने चंग की थाप पर पारंपरिक फाग गीतों की ऐसी रसधार बहाई कि दर्शक खुद को थिरकने से नहीं रोक सके। फाग के रंगों में रचे-बसे गीतों और लोकधुनों ने मरुभूमि की संस्कृति की महक बिखेर दी। कार्यक्रम में बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई और पूरा माहौल पारंपरिक उत्सव में बदल गया।
इस अवसर पर पत्रकार पीयूष शर्मा स्मृति पुरस्कार पत्रकार राहुल शर्मा को तथा पूर्व सभापति रमाकांत ओझा की स्मृति में लोक कलाकार पंकज ओझा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सभापति गोविंद महनसरिया ने की तथा मुख्य अतिथि पूर्व सभापति विजय शर्मा रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. प्रमोद बाजोरिया, एपीआरओ मनीष कुमार, महेंद्र चौबे, विनोद ओझा, भास्कर शर्मा और हरिप्रसाद पीपलवा मौजूद रहे।अतिथियों का स्वागत विभिन्न गणमान्य नागरिकों द्वारा किया गया तथा संचालन उमेश दाधीच ने किया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि आधुनिकता की दौड़ में भी लोक संस्कृति की जड़ों को संजोए रखना आवश्यक है। चंग की थाप, पारंपरिक वेशभूषा और सामूहिक सहभागिता ने चूरू की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाया।
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