स्वर्ण समाज की अनदेखी से बढ़ रहा आक्रोश, बोर्डों के गठन की उठी मांग
झुंझुनूं I अजीत जांगिड़
ईडब्ल्यूएस आरक्षण एवं उससे जुड़ी विसंगतियों को लेकर विप्र सेना के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष महेश बसावतिया ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के बावजूद स्वर्ण समाज से जुड़े मुद्दे आज भी लंबित हैं, जो इस वर्ग के प्रति सरकार की उपेक्षा को दर्शाता है।बसावतिया ने बयान में कहा कि ईडब्ल्यूएस व सामान्य वर्ग में राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य, माथुर, कायस्थ, जैन, मुस्लिम सहित अन्य अनारक्षित वर्ग आते हैं, लेकिन सरकार द्वारा अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इससे समाज के युवाओं और विद्यार्थियों में निराशा का माहौल है।उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ईडब्ल्यूएस बोर्ड, विप्र कल्याण बोर्ड, देवस्थान बोर्ड, राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास मंडल, अग्रसेन बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण बोर्ड सक्रिय रूप से कार्यरत थे, जिनसे इस वर्ग के छात्रों, पंडित-पुजारियों एवं सामाजिक संस्थाओं को सीधा लाभ मिलता था।महेश बसावतिया ने कहा कि वर्तमान सरकार में इन बोर्डों का कोई अस्तित्व नजर नहीं आ रहा, जिससे जरूरतमंद वर्ग को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो स्वर्ण समाज में सरकार के प्रति आक्रोश और अधिक बढ़ेगा। बसावतिया ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांग की कि आगामी बजट में ईडब्ल्यूएस आरक्षण की विसंगतियों को दूर करने हेतु ठोस निर्णय लिया जाए तथा सभी संबंधित बोर्डों का तत्काल पुनर्गठन किया जाए, ताकि समाज के वंचित वर्ग को न्याय मिल सके।
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