ऋषिकुल ब्रह्मचर्याश्रम चूरू के ब्रह्मचारियों का शास्त्रीय स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन

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राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 4 स्वर्ण, 5 रजत व 5 कांस्य सहित कुल 14 पदक जीतकर किया प्रदेश का नाम रोशन

चूरू। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली की ओर से जयपुर में आयोजित अखिल भारतीय शास्त्रीय स्पर्धा के अंतर्गत राजस्थान राज्यस्तरीय प्रतियोगिता 2025–26 में संस्कार-आधारित गुरुकुलीय शिक्षा के केंद्र श्री ऋषिकुल ब्रह्मचर्याश्रम, चूरू के ब्रह्मचारियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल 14 पदक अर्जित किए। प्रतियोगिता में आश्रम के विद्यार्थियों ने 4 स्वर्ण, 5 रजत एवं 5 कांस्य पदक जीतकर राज्य स्तर पर संस्था का गौरव बढ़ाया।सेठ जयदलाल गोयनका द्वारा संस्थापित, स्वामी रामसुखदास एवं हनुमानप्रसाद पोद्दार द्वारा पालित-पोषित तथा गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा संचालित ऋषिकुल ब्रह्मचर्याश्रम आज भी परंपरागत संस्कृत शिक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठता का मानक स्थापित कर रहा है।प्रतियोगिता में श्रीमद्भगवद्गीता एवं नारायण पुराणेतिहास शलाका (रामायण) में अजय, चरक संहिता कण्ठपाठ में अमन तथा दर्शनसूत्र कण्ठपाठ में नितिन ने स्वर्ण पदक प्राप्त किए। रजत पदक रामायण कण्ठपाठ में प्रियांशु, दर्शनसूत्र कण्ठपाठ में संदीप, काव्य कण्ठपाठ (किरातार्जुनीयम्) में तेजस्व, उपनिषद् कण्ठपाठ (प्रश्न एवं ऐतरेय) में अंकित तथा अक्षरश्लोकी में मोहित ने जीते। वहीं ज्योतिष शलाका में केशव, सुभाषित कण्ठपाठ में दिशांत तथा श्रवण शास्त्रीय स्फूर्ति (क्विज) में श्रवण ने कांस्य पदक हासिल किए। समस्यापूर्ति का विशिष्ट पुरस्कार दिशांत को प्रदान किया गया।संस्था के व्यवस्थापक एवं आचार्यों ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता किसी तात्कालिक प्रयास का परिणाम नहीं, बल्कि ब्रह्मचर्य, कठोर अनुशासन, गुरु–शिष्य परंपरा और निरंतर शास्त्रीय साधना का सुफल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऋषिकुल ब्रह्मचर्याश्रम का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताएं जीतना नहीं, बल्कि संस्कृत, संस्कृति और चरित्र का निर्माण करना है।

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