मुंडा गांव के सुनील राव ने राज्य स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता में जीता स्वर्ण पदक

गौरव का क्षण—सुनील ने श्रीगंगानगर टीम से खेलते हुए रचा इतिहास, परिवार और कोच को दिया सफलता का श्रेय

हनुमानगढ़ । हिमांशु मिढ्ढा
जिले के मुंडा गांव के प्रतिभाशाली खिलाड़ी सुनील राव ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से जिले का नाम पूरे प्रदेश में रोशन किया है। उन्होंने वैर (भरतपुर) में आयोजित 69वीं राज्य स्तरीय विद्यालयी 17 वर्षीय कबड्डी प्रतियोगिता में श्रीगंगानगर जिले की टीम से खेलते हुए स्वर्ण पदक जीता। सुनील की इस उपलब्धि से मुंडा गांव ही नहीं, बल्कि पूरे हनुमानगढ़ जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है।जानकारी के अनुसार प्रतियोगिता में प्रदेशभर से चुनिंदा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने भाग लिया। कठिन मुकाबलों के बीच सुनील राव ने अपनी फुर्ती, तकनीक और रणनीति के दम पर टीम को विजय दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अपने दमदार प्रदर्शन से निर्णायक अंक हासिल किए और टीम को फाइनल मुकाबले में स्वर्ण पदक तक पहुंचाया।सुनील राव ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोच जसप्रीत सिंह और सुधीर मालिया को दिया। उन्होंने कहा कि कोच की कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर मार्गदर्शन के कारण ही वे यह मुकाम हासिल कर सके हैं। साथ ही उन्होंने अपने बड़े पापा सुंदरलाल चौहान, पिता ओमप्रकाश और बड़े भाई विनोद चौहान को भी इस सफलता का श्रेय देते हुए कहा कि परिवार के निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन ने उन्हें हर चुनौती का सामना करने की ताकत दी।सुनील ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से कबड्डी खेल की नियमित अभ्यास कर रहे हैं और उनका लक्ष्य आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का नाम रोशन करना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में सीमित सुविधाओं के बावजूद यदि खिलाड़ी लगन और मेहनत से खेलें तो सफलता अवश्य मिलती है।उल्लेखनीय है कि सुनील राव पिछले वर्ष भी 14 वर्षीय राजस्थान टीम से खेल चुके हैं, जहां उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया था। उनके प्रदर्शन को देखते हुए खेल प्रेमियों का मानना है कि सुनील भविष्य में राज्य और देश दोनों स्तरों पर बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे।सुनील की इस उपलब्धि से पूरे मुंडा गांव में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों ने उनके घर पहुंचकर मिठाई बांटी और परिवार को बधाई दी। गांव के वरिष्ठजनों ने कहा कि सुनील की मेहनत और लगन आज के युवाओं के लिए प्रेरणा है। इस सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि संकल्प मजबूत हो तो गांवों से भी राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।

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