भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुलहरि ने ही दो महीने में बांट दी बीजेपी?

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चिड़ावा में दिखी तस्वीर बनी चर्चा का विषय, उप जिला अस्पताल में हुए कार्यक्रम में बीजेपी नेता नदारद

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
जिला प्रमुख हर्षिनी कुलहरि को भाजपा जिलाध्यक्ष बने हुए अभी करीब दो महीने ही हुए है कि हर्षिनी कुलहरि चिड़ावा कस्बे में या तो स्थानीय राजनीति की शिकार हो गई। या फिर वे जानबूझकर ऐसा काम कर बैठी। जिससे सियासी गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि जिला अध्यक्ष हर्षिनी कुलहरि ने बीजेपी को बांटने का काम शुरू कर दिया है। दरअसल गुरूवार को चिड़ावा उप जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा शुरू की गई है। जिसका लोकार्पण करने के लिए जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुलहरि पहुंची। लेकिन कार्यक्रम में ना तो विधानसभा के प्रत्याशी व भाजपा जिला महामंत्री राजेश दहिया दिखाई दिए। ना ही नगर मंडल भाजपा के अध्यक्ष नरेंद्र गिरधर या फिर अन्य कोई भाजपा का वो कार्यकर्ता जो गत विधानसभा चुनावों में भाजपा के बागी कैलाश मेघवाल तथा कांग्रेस, दोनों से संघर्ष कर रहा था। इस कार्यक्रम में ओबीसी आयोग के सदस्य व पूर्व जिलाध्यक्ष पवन मावंडिया तथा पूर्व प्रधान कैलाश मेघवाल शामिल हुए। जब इस मामले में पड़ताल की गई तो सामने आया कि जिलाध्यक्ष ने इस कार्यक्रम की जानकारी ना तो राजेश दहिया को दी और ना ही नगर मंडल अध्यक्ष को दी। दो महीने पहले संगठन की एकता का आह्वान करने वाली जिलाध्यक्ष हर्षिनी कुलहरि महज दो महीने बाद ही पार्टी के नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों को दरकिनार करते हुए नजर आई। जो चर्चा का विषय बन गया है। बहरहाल, यह भाजपा का अंदरूनी मामला है। मुख्य खबर यह है कि आज चिड़ावा के उप जिला अस्पताल में दो अत्याधुनिक डायलिसिस मशीनों का शुभारंभ किया गया। भाजपा जिला अध्यक्ष हर्षिणी कुल्हरी ने इस सुविधा का उद्घाटन किया। अब मरीजों को डायलिसिस के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इससे उनका समय और पैसा दोनों बचेगा। कार्यक्रम में ओबीसी आयोग के सदस्य पवन मावंडिया, पूर्व प्रधान कैलाश मेघवाल, पिलानी प्रधान बिरमा देवी और झेरली सरपंच अनुप देवी मौजूद थे। पीएमओ डॉ. नितेश जांगिड़, डॉ. नेहा सुथार और डॉ. सन्त कुमार जांगिड़ समेत अन्य चिकित्सक भी शामिल हुए। आपको यहां यह भी बता दें कि हर्षिनी कुलहरि को जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद भाजपा के तत्कालीन प्रदेश प्रवक्ता कृष्ण कुमार जानूं ने भी सवाल उठाए थे। जिसके बाद पार्टी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। विवादों में होने के बावजूद हर्षिनी कुलहरि द्वारा पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों को दरकिनार करना राजनैतिक जानकारों के अनुसार अच्छा संकेत नहीं है।

मैं सरकारी कार्यक्रम में आई — कुलहरि

इस मामले में जब पत्रकारों ने हर्षिनी कुलहरि से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि यह कोई कार्यक्रम पार्टी विशेष का कार्यक्रम नहीं है। वे जिला प्रमुख के पद पर है। इसलिए जिलाध्यक्ष व जिला प्रमुख, दोनों के नाते से आई है। लेकिन कार्यक्रम सरकारी है। पर कुलहरि को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि प्रदेश व केंद्र सरकार के मंत्री भी जब जिले में आते है तो वे एक प्रोटोकॉल के नाते जिलाध्यक्षों को इसकी जानकारी देते है। कार्यक्रम में सिर्फ पार्टी के पदाधिकारियों को ही दरकिनार नहीं किया गया। बल्कि विधानसभा चुनाव लड़ चुके और जिला महामंत्री जैसे पद को संभाल रहे राजेश दहिया को भी दरकिनार किया गया है।

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