झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में चल रहे आंदोलन को लगातार समर्थन मिल रहा है। इसको लेकर गांव-ढाणियों में समर्थन सभाएं आयोजित हो रही है। संघर्ष समिति के सदस्य राजेंद्र फौजी के नेतृत्व में झुंझुनूं में नुक्कड़ सभाएं की गई। जहां मरुसेना संगठन, टैक्सी यूनियन झुंझुनूं, प्राइवेट बस यूनियन, नई नाज मंडी समिति व भीम आर्मी झुंझुनूं ने समर्थन दिया। मरुसेना अध्यक्ष एडवोकेट जयंत मूंड ने समर्थन देते हुए कहा कि सरकार स्मार्ट मीटर का जबरन थोपना बंद करें। सरकार और बिजली कंपनियाँ कहती हैं कि स्मार्ट मीटर से पारदर्शिता बढ़ेगी, चोरी रुकेगी और उपभोक्ता को फायदा होगा लेकिन सच्चाई यह है कि इन मीटरों ने लोगों की नींद हराम कर दी है। कई जगहों पर देखा गया है कि बिना बिजली का इस्तेमाल किए ही भारी-भरकम बिल आने लगे, रात-दिन की रीडिंग में गड़बड़ी है और उपभोक्ता को अपनी ही खपत पर शक हो रहा है। पहले जहां लाइनमैन आकर मीटर देख लेता था। अब पूरी तरह मशीन पर निर्भरता थोप दी गई है। अगर गलती हो जाए तो उपभोक्ता को दर-दर भटकना पड़ता है। न शिकायत सुनी जाती है, न समाधान होता है। इसके अलावा, इन मीटरों का चार्ज भी आम आदमी की जेब से लिया जा रहा है—यानी बिजली का बिल तो बढ़ ही रहा है, ऊपर से इन महंगे मीटरों का बोझ भी उपभोक्ता पर डाला जा रहा है। यह सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं है, यह जनता पर आर्थिक हमला है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार पहले ही महंगाई से टूटे पड़े हैं। ऊपर से जबरन स्मार्ट मीटर लगाकर उन्हें और परेशान किया जा रहा है।