जटिल प्रसव के बाद पीपीएच होने के बाद भी बीडीके अस्पताल में चिकित्सकों की टीम ने बचाया

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पीपीएच होने पर 30-60 प्रतिशत प्रसूताओं को बचाना मुश्किल होता है, बीडीके अस्पताल में लेबर रूम, आपरेशन थियेटर,बल्ड बैंक, नवजात आईसीयू, गंभीर आईसीयू एक ही जगह होने से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने बचाया प्रसूता को

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
ठिमाऊ बड़ी निवासी 25 वर्षीय निशा प्रसव के लिए शनिवार रात को बीडीके अस्पताल में भर्ती हुई। प्रसूता के पाॅलीहाईड्रोम्नियोज, उच्च रक्तचाप के चलते प्रसव जटिल होने की संभावना के चलते भर्ती हुई। शनिवार रात को अस्पताल में मौजूद प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, रेजीडेंट चिकित्सक, सीनियर रेजिडेंट चिकित्सक, ऑन कॉल सीनियर चिकित्सक सुशीला के द्वारा उपचार आरंभ किया गया। चिकित्सक निरंतर बल्ड प्रेशर, बच्चे की धड़कन, आनलाईन प्रसव वाॅच से निरंतर मॉनिटरिंग करते रहे। हाईरिस्क प्रसव होने के निरंतर माॅनिटिरिंग के बाद सामान्य प्रसव से बच्चे का जन्म हुआ। परंतु डिलीवरी के तुरंत बाद ही निशा को सुबह नौ बजे पीपीएच हो गया। पाॅली हाईड्रोम्नियोज एवं एटोनिक गर्भाशय से रक्त स्राव अत्यधिक तेज हो गया। चिकित्सकों की टीम ने तुरंत कॉम्प्लिकेशन से बचाने के लिए रोगी को ऑपरेशन थिएटर में स्थानांतरित किया गया। निश्चेतन विशेषज्ञ, प्रसूति रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ एवं सर्जन की टीम ने बच्चेदानी का आॅपरेशन कर अत्यधिक रक्त स्राव पर नियंत्रण किया गया। परंतु बल्ड प्रेशर अत्यंत न्यून होने एवं खून बहने से खून की अत्यधिक कमीं होने से रोगी हाईपोवोलेमिक शाॅक में चला गया। तुरंत बच्चादानी का आॅपरेशन कर रक्त स्राव पर काबू पाने के बाद खून की कमी, घटते ब्ल्ड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए आईसीयू में भर्ती किया गया है। जहां फिजिशियन, निश्चेतन विशेषज्ञ, प्रसूति रोग विशेषज्ञ द्वारा निरंतर माॅनिटिरिंग की जाती रही है। पीएमओ डॉ. जितेंद्र भांबू रविवार का दिन होते हुए भी अस्पताल आईसीयू में आकर चिकित्सकों की टीम को निरंतर समन्वय बनाने एवं आवश्यक बल्ड, दवा, अतिरिक्त स्टाफ आदि उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित करते रहे। परंतु रोगी गंभीर स्थिति के कारण सेशुचेरेशन निरंतर घटता जा रहा था। सांस की गति अत्यधिक तेज हो रही थी। परंतु आईसीयू में निरंतर जांच एवं उपचार से 48 घंटे बाद धीरे-धीरे रोगी में सुधार हुआ। सात दिन भर्ती रहने के बाद रोगी को स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज किया गया। रोगी निशा ने बीडीके अस्पताल की टीम को गंभीर हालत में उपचार करने पर पीएमओ डॉ. जितेंद्र भांबू एक टीम का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बताया कि मेरे लिए यह एक नए जीवन जैसा प्रतीत हो रहा है। आंखों में अंधेरा सा छा रहा था।बेहोशी छा रही है। अस्पताल की बेहतरीन सेवाओं की संतुष्टि जाहिर की। पीएमओ डॉ. जितेंद्र भांबू ने बताया कि बीडीके अस्पताल में की मातृ एवं शिशु ईकाई में 24 घंटे सातों दिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, आपरेशन थिएटर, नवजात आईसीयू, ब्लड बैंक सभी एक ही छत के नीचे होने से अविलंब बेहतरीन सेवाएं मिल पा रही है। पीएमओ डॉ. जितेंद्र भांबू ने बताया कि चिकित्सकों ने टीम भावना से कार्य किया तथा टीम के सदस्यों का परस्पर सहयोग, सामंजस्य उत्तम रहा है। चिकित्सकों की टीम द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग से पीपीएच से पीड़ित प्रसूता की जान बचना स्वास्थ्यकर्मियों एवं आमजन के लिए उत्साहवर्धक है।

टीम में ये शामिल थे

चिकित्सकों की टीम में डॉ. सुशीला, डॉ. अनिता गुप्ता, डॉ. प्रियंका सेखसरिया, डॉ. पुष्पा रावत, डॉ. आकांक्षा, डॉ. मधु तंवर, डॉ. राजीव दूलड़, डॉ. ललिता, डॉ. विजय झाझड़िया, रेजीडेंट डॉक्टर्स एवं नर्सिंग स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

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