माता-पिता की स्मृति में बेटों ने बनवाई ‘चार दिवारी’, जीवों के प्रति संवेदना का दिया बड़ा संदेश
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
जहां एक ओर आधुनिक जीवन की भागदौड़ में इंसान अक्सर प्रकृति और जीव-जंतुओं से दूर होता जा रहा है, वहीं शहर में एक ऐसा प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जिसने मानवता और जीव प्रेम की मिसाल पेश कर दी। शहर में कबूतरों के संरक्षण और सुरक्षित भोजन के लिए विशेष रूप से चार दिवारी का निर्माण कराया गया है। यह सराहनीय कार्य स्वर्गीय श्री नोपचन्द नारनोली एवं श्रीमती माया देवी की पुण्य स्मृति में उनके सुपुत्र सुशील नारनोली और नरेश नारनोली द्वारा करवाया गया। इस अनूठी पहल के माध्यम से न केवल पक्षियों को सुरक्षित स्थान मिलेगा, बल्कि यह समाज को जीव-जंतुओं के प्रति दया और सहअस्तित्व का संदेश भी देती है। तेजी से घटती प्राकृतिक जगहों के बीच इस तरह की संरचनाएं पक्षियों के लिए संजीवनी साबित होती हैं। अक्सर लोग अपने प्रियजनों की स्मृति में धार्मिक या सामाजिक कार्य करते हैं, लेकिन जीव-जंतुओं के लिए इस तरह का समर्पण कम ही देखने को मिलता है। नारनोली परिवार ने अपने माता-पिता की याद को सेवा और करुणा से जोड़कर एक मिसाल कायम की है। वर्ष 2026 में निर्मित यह कबूतरखाना अब न केवल पक्षियों का आश्रय स्थल बनेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी पर्यावरण संरक्षण और जीव प्रेम की सीख देगा।










