राजपूत राजनीतिक पुनरुत्थान का बिगुल: झुंझुनूं से उठी आवाज, सालासर शिविर को ऐतिहासिक बनाने की रणनीति

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5 जिलों के प्रतिनिधियों की महाबैठक, EWS आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर मंथन, “अब हाशिए पर नहीं रहेगा समाज” — सर्वसम्मति से बड़े फैसलों के संकेत, अन्य वर्गों का भी मिला समर्थन

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
राजस्थान की राजनीति में नई हलचल पैदा करते हुए राजपूत समाज ने झुंझुनूं से अपने राजनीतिक पुनरुत्थान का शंखनाद कर दिया है। सोमवार को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर भवन में आयोजित विशाल बैठक में झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र समेत चूरू, सीकर, नागौर और डीडवाना-कुचामन के प्रतिनिधियों ने एक मंच पर आकर स्पष्ट संकेत दिए कि अब समाज अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर निर्णायक कदम उठाने के लिए तैयार है। बैठक का आयोजन 23-24 मई को सालासर धाम में प्रस्तावित “राजपूत राजनीतिक पुनरुत्थान शिविर” को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने की रणनीति के तहत किया गया। संयोजक इंजीनियर महावीर सिंह शेखावत झाझड़ ने कहा कि इस शिविर में ऐसी ठोस रणनीति तैयार की जाएगी जिससे EWS आरक्षण को पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में लागू करवाया जा सके और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो।

“34 सीटों पर हाशिए पर समाज, अब चुप नहीं रहेंगे”

बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि इन पांच जिलों की 34 विधानसभा सीटों पर राजपूत समाज राजनीतिक रूप से हाशिए पर चला गया है, जिससे समाज में गहरी निराशा और आक्रोश है। नेताओं ने साफ किया कि अब समाज के पास सभी राजनीतिक विकल्प खुले हैं और सही समय आने पर सर्वसम्मति से बड़ा निर्णय लिया जाएगा। वक्ताओं ने राष्ट्रीय दलों पर जातिगत तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि बड़ी आबादी होने के बावजूद समाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसके चलते केवल राजपूत ही नहीं बल्कि SC, ST, OBC और सामान्य वर्ग भी उपेक्षा का दर्द झेल रहे हैं।

EWS आरक्षण बना केंद्रीय मुद्दा

बैठक में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर दिया गया कि पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में EWS आरक्षण लागू किया जाए अन्य आरक्षित वर्गों की तरह सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को भी प्रतिनिधित्व मिले I चेतावनी दी गई कि यदि आने वाले चुनावों में यह व्यवस्था लागू नहीं हुई, तो समाज किसी भी राजनीतिक विकल्प को अपनाने के लिए स्वतंत्र होगा।

“सबका साथ-सबका विकास” पर सवाल

बैठक में यह भी कहा गया कि राजनीतिक दलों का नारा “सबका साथ, सबका विकास” अब जुमला बनकर रह गया है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि हिंदू-मुस्लिम विभाजन की राजनीति से समाज पूरी तरह ऊब चुका है और अब विकास व समानता की राजनीति चाहता है।

सामाजिक एकता का संदेश, कई वर्गों का समर्थन

इस महाबैठक की खास बात यह रही कि इसमें कायमखानी, पठान, सैनी, नायक, मेघवाल सहित विभिन्न मुस्लिम और अन्य वर्गों के प्रतिनिधियों ने पहुंचकर समर्थन दिया। वक्ताओं ने कहा कि राजपूत समाज का पुनरुत्थान केवल एक वर्ग का नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और समानता की स्थापना का रास्ता बनेगा, जिसमें सभी की भागीदारी होगी।

प्रदेशभर के नेताओं की मौजूदगी

बैठक में सीकर, नागौर और झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्रों से अनेक जनप्रतिनिधि, पूर्व पदाधिकारी, सरपंच, सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन रघुबीर सिंह बारवा ने किया, जबकि ओनाड़ सिंह भाखरवासी ने स्वागत और सूबेदार बच्चन सिंह लिखवा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

अब नजरें सालासर शिविर पर

झुंझुनूं की इस बैठक के बाद अब पूरे क्षेत्र की नजरें सालासर धाम में होने वाले दो दिवसीय शिविर पर टिक गई हैं, जहां से राजपूत समाज की राजनीति की नई दिशा तय होने के संकेत मिल रहे हैं। साफ है, झुंझुनूं से उठी यह आवाज आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति में बड़ा समीकरण बदलने का संकेत बन सकती है।

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