पिलानी । झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
बाबा मढी धाम सुजडौला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर आस्था का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। दूर-दराज क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते पूरा कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। संत-महात्माओं की निरंतर उपस्थिति और भजनों की मधुर ध्वनि ने आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। वृंदावन धाम से पधारे कथावाचक आनंद कृष्ण व्यास ने व्यासपीठ से भगवान के विभिन्न अवतारों का मार्मिक वर्णन करते हुए भक्त प्रहलाद की अटूट भक्ति, हिरण्यकश्यप के अहंकार के अंत और भगवान नरसिंह के प्राकट्य का प्रेरक प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान भक्तों को यह संदेश दिया गया कि भगवान सदैव अपने सच्चे भक्तों की रक्षा करते हैं और अहंकार का विनाश निश्चित है। उन्होंने भगवान वामन अवतार की कथा में राजा बलि के दंभ को तीन पग भूमि मांगकर समाप्त करने का प्रसंग सुनाया। वहीं समुद्र मंथन की कथा के माध्यम से देवासुर संग्राम और अमृत प्राप्ति का भावपूर्ण वर्णन किया। भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं में पूतना वध और कृष्ण जन्मोत्सव का वर्णन होते ही पंडाल में भक्तों ने खड़े होकर जयकारों के साथ उत्सव मनाया। जिससे वातावरण कृष्णमय हो गया। रात्रिकालीन रासलीला में महिलाओं और बच्चों की विशेष भीड़ उमड़ी। सजीव झांकियों ने सभी का मन मोह लिया और श्रद्धालु देर रात तक भक्ति रस में डूबे रहे। समाजसेवी एवं भाजपा नेता महेश बसावतिया ने बताया कि पूरे आयोजन का संचालन बाबा आकाशगिरी के नेतृत्व में सुचारू रूप से किया जा रहा है। जिसमें विभिन्न गांवों के श्रद्धालु सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए आगंतुक संतों ने इसे क्षेत्र का भव्य और अनुकरणीय धार्मिक आयोजन बताया। भागवत कथा के आगामी दिनों में भी इसी प्रकार भक्तों की उपस्थिति रहने की संभावना जताई जा रही है। आयोजन स्थल पर भक्ति, सेवा और श्रद्धा का अद्भुत संगम क्षेत्र की धार्मिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।
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