दुआओं की स्याही से लिखो अपनी तकदीर, मार्क्स कम-ज्यादा मायने नहीं रखते
नवलगढ़ । झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
बलवंतपुरा स्थित डूंडलोद गर्ल्स स्कूल में वार्षिकोत्सव ‘एलैसिया 2026’ का आयोजन उत्साह और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फिल्म अभिनेता, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर सोनू सूद रहे। जबकि अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मूर्तिकार नरेश कुमावत विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दीप प्रज्ज्वलन के साथ समारोह का शुभारंभ हुआ। छात्राओं ने नृत्य-नाटिकाओं, स्कूल बैंड और ऑर्केस्ट्रा की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। बेस्ट डांसर, बेस्ट एकेडमिक, रेगुलैरिटी और ऑल-राउंड परफॉर्मेंस जैसी श्रेणियों में प्रतिभावान छात्राओं को सम्मानित किया गया। विद्यालय सचिव व प्रसिद्ध मोटिवेटर बीएल रणवां ने बताया कि उत्सव का उद्देश्य छात्राओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। जबकि प्राचार्या इंदु सोनी ने इसे शिक्षा और संस्कृति का उत्सव बताया। ‘एलैसिया 2026’ शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सरोकार का ऐसा प्रेरक उत्सव बन गया। जिसे उपस्थित जनसमूह लंबे समय तक याद रखेगा।डूण्डलोद गर्ल्स स्कूल के वार्षिकोत्सव में संबोधित करते हुए सोनू सूद ने विद्यार्थियों को जीवन का असली अर्थ समझाया। उन्होंने अपनी मां की सीख साझा करते हुए कहा कि उनकी मां हमेशा कहती है कि सोनू अपनी जिंदगी की कलम में दुआओं की स्याही डाल ले,।फिर देख तेरा नाम पन्नों पर नहीं आसमान पर लिखा जाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता केवल अंकों से नहीं मापी जाती। अगर किसी के मार्क्स दस कम आ गए या कोई दूसरा एक नंबर ज्यादा ले गया। तो इससे जीवन की दौड़ तय नहीं होती। असली मायने इस बात के हैं कि आपका जुनून क्या है और आपका उद्देश्य क्या है। सोनू सूद ने कहा कि बस एक ही जुनून रखिए कि जो भी करूंगा, अपने माता-पिता को गर्व महसूस कराऊंगा। लेकिन उससे भी जरूरी है कि मैं इतना काबिल बनूं कि कल किसी की जिंदगी बदल सकूं। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि जिंदगी में पर्पज मिलना सबसे अहम है। जब लक्ष्य केवल नंबर लाना नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाना हो, तो फिर कोई भी आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता। महाशिवरात्रि के अवसर पर उन्होंने भगवान शिव से सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि उनका इस मंच पर आना तभी सफल होगा जब वे सब मिलकर कुछ जिंदगियां बदल सकें। इस मौके पर स्कूल चेयरमैन सुलतानसिंह रणवां, राहुल रणवां, श्रीचंद रणवां, बीएल आर्य, महेंद्रसिंह, रामकुमार सिंह, कैलाश चोटिया, एडीईओ सैकंडरी उम्मेद महला, अशोक शर्मा, कुलदीप शर्मा, भाजपा जिला महामंत्री योगेंद्र मिश्रा, सुभाष बुडानिया, केडी यादव, दयाशंकर जांगिड़, डी. लाल व बाल कल्याण समिति की पूर्व सदस्य मनीषा केडिया आदि जनमान्य उपस्थित रहे।
कोविड काल का अनुभव बना टर्निंग पॉइंट
सोनू सूद ने कोविड काल का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे एक परिवार को पैदल कर्नाटक जाते देख उन्होंने बसों की व्यवस्था का निर्णय लिया। चार दिन की भागदौड़ के बाद पहली बार 10 बसों से 350 लोगों को भेजा। पता ही नहीं चला कि वो सफर साढ़े सात लाख लोगों तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि जब आप सच्ची नीयत से लगे रहते हैं तो ऊपर वाला आपके हाथ से कलम पकड़कर खुद लिखना शुरू कर देता है। अपने संबोधन में सोनू सूद ने छात्रों को जीवन का असली उद्देश्य समझाया। उन्होंने कहा कि एक्शन कमाल का किया और लगा कि यही करने आए थे, लेकिन विश्वास मानिए वो असली सपना नहीं था। असली सपना तब पूरा हुआ जब आम इंसान से जुड़ने का मौका मिला, और वो कोविड के समय हुआ। उन्होंने कहा कि जीवन में दो सबसे बड़े शब्द हैं— उम्मीद और कोशिश। अगर कोई आपसे उम्मीद नहीं रखता और आप किसी के लिए कोशिश नहीं कर सकते, तो जीवन अधूरा है। बैंक बैलेंस, गाड़ियां और बंगले मायने नहीं रखते, जब तक कोई जरूरतमंद यह महसूस न करे कि आप उसकी जिंदगी बदल सकते हैं।
स्कूलों में गिविंग पीरियड भी होना चाहिए
सोनू सूद ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ गिविंग पीरियड भी होना चाहिए। ऐसा पीरियड जिसमें बच्चों को सिखाया जाए कि दूसरों की मदद कैसे की जाती है। उन्होंने कहा कि अगर बचपन में मदद का बीज बो दिया जाए। तो भविष्य में कोई जरूरतमंद दरवाजे पर खड़ा नहीं रहेगा। उन्होंने विद्यार्थियों को हौंसला बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि “हौंसला रख, एक समय ऐसा आएगा… जब घड़ी किसी और की होगी और समय तेरा बताएगा।” साथ ही अपनी लिखी पंक्तियां भी सुनाईं “तू अपनी खूबियां ढूंढ, कमियां निकालने के लिए तो लोग हैं ना…, तू कुछ ऐसा करके दिखा दुनिया को, फिर तालियां बजाने के लिए तो लोग हैं ना।”
बच्चों की पहुंच बहुत लंबी है
फिल्म दबंग के प्रसिद्ध डायलॉग का जिक्र करते हुए उन्होंने माहौल को हल्का किया और कहा कि कानून के हाथ और सोनू सूद की लात दोनों बहुत लंबी हैं भैया… लेकिन यहां के स्कूल के बच्चों की पहुंच उससे भी लंबी है। उन्होंने विश्वास जताया कि यहां से भविष्य के आईएएस, आईपीएस, नेता और कलाकार निकलेंगे जो देश ही नहीं, दुनिया में नाम रोशन करेंगे।
गांव की बेटियां 2047 के विकसित भारत की आधारशिला बनेंगी – बीएल रणवां
कार्यक्रम में बोलते हुए स्कूल सचिव बीएल रणवां ने अपने संबोधन में कहा कि जब भी किसी अतिथि को विद्यालय में आमंत्रित किया जाता है, तो उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बच्चों को प्रेरणा देना होता है। उन्होंने मुख्य अतिथि सोनू सूद का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सोच, विजन और कर्म बच्चों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे और विद्यालय उनके बताए रास्ते पर छात्राओं को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा। रणवां ने बताया कि डूण्डलोद शिक्षण संस्थान पहले से डूण्डलोद पब्लिक स्कूल, डूण्डलोद और डूण्डलोद पब्लिक स्कूल, झुंझुनूं संचालित कर रहा था। कार्य करते-करते विचार आया कि बेटियों के लिए अलग स्कूल खोला जाए, जहां वे बिना किसी रोक-टोक के खुलकर आगे बढ़ सकें। इसी सोच से डूण्डलोद गर्ल्स स्कूल, बलवंतपुरा की स्थापना हुई। उन्होंने कहा कि मात्र दो वर्षों में छात्राओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है, जो गर्व का विषय है।
चार स्तंभों पर आधारित शिक्षा मॉडल
सचिव बीएल रणवां ने कहा कि उनकी स्कूलों में शिक्षा के मॉडल के चार प्रमुख स्तंभ है। पहला वैल्यूज, जिसमें व्यक्तिगत, सामाजिक और राष्ट्रीय मूल्यों का विकास। दूसरा पर्सनालिटी डेवलपमेंट, जिसमें ड्रेस सेंस, अनुशासन, समयपालन, संवाद शैली, बॉडी लैंग्वेज और हेल्पिंग नेचर। तीसरा एकेडमिक उत्कृष्टता, जिसमें रटने की पद्धति के बजाय थॉट प्रोसेस आधारित शिक्षण तथा चौथा स्पोर्ट्स व स्टेज एक्सपोजर, जिसमें बच्चियां मंच पर आत्मविश्वास से अपनी बात रख सकें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दूसरी कक्षा की छात्रा ने जिस आत्मविश्वास से एंकरिंग की, वह विद्यालय की गुणवत्ता का प्रमाण है। एक कार्यक्रम में जिला कलेक्टर ने भी छात्राओं की व्यक्तित्व और संवाद शैली की सराहना की। नए सत्र से कक्षा छह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और कक्षा 3 से साइबर सिक्योरिटी की पढ़ाई शुरू की जा रही है। इसके साथ ही मास मीडिया, फैशन डिजाइन और फूड एंड न्यूट्रिशन जैसे विषय भी जोड़े जाएंगे, जो सामान्यतः बड़े शहरों में उपलब्ध होते हैं। रणवां ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के विचार को याद करते हुए कहा कि देश का विकास गांव और खेत-खलिहानों से होकर निकलता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश—सुबह की चिड़ियों की चहचहाहट, खेतों की हरियाली और सकारात्मक वातावरण—बच्चियों के सर्वांगीण विकास में सहायक है। स्कूल और गांव मिलकर छात्राओं को आगे बढ़ा रहे हैं। अपने संबोधन के अंत में रणवां ने सोनू सूद से आग्रह किया कि वे गांव की बेटियों पर फिल्म बनाएं—ऐसी बेटियों पर जो ढाणी और खेतों से निकलकर शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि कहानी, मंच और कैनवास हम देंगे, आपको बस उसमें रंग भरना है।
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