झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय (जीएमसी) में चल रहा विवाद अब और तेज हो गया है। एक ओर जिलेभर के सेवारत चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं दूसरी ओर एमबीबीएस छात्रों ने भी कक्षाओं का बहिष्कार कर धरना शुरू कर दिया। अरिसदा झुंझुनूं के आह्वान पर छह सेवारत चिकित्सकों के पदनाम विलोपन के विरोध में जिलेभर के चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। राजकीय बीडीके अस्पताल में सेवारत चिकित्सकों ने मुख्यद्वार पर काली पट्टी बांधकर नारेबाजी की। चिकित्सकों का आरोप है कि जीएमसी प्रधानाचार्य डॉ. राकेश साबू द्वारा तानाशाही एवं बर्बरतापूर्ण रवैया अपनाया गया। जिससे चिकित्सक वर्ग आहत है। पदनामित चिकित्सक कॉलेज की शुरुआत से बिना किसी अतिरिक्त मानदेय के शिक्षण सेवाएं दे रहे थे। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग दिल्ली को ज्ञापन भेजकर पदनामित चिकित्सकों की बहाली तथा प्रधानाचार्य पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर पद से हटाने की मांग की गई है। चिकित्सकों का कहना है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की गाइडलाइन एवं राजस्थान सरकार के निर्देशानुसार पदनामित किया गया था। एनएमसी की टेक-25 के तहत समायोजन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पद विलोपन के लिए आयोग और राज्य सरकार की अनुमति आवश्यक है। बिना सक्षम स्तर की अनुमति के पदनाम विलोपन से छह चिकित्सक अपमानित महसूस कर रहे हैं। अरिसदा प्रवक्ता डॉ. विजय झाझड़िया ने कहा कि जब तक प्रधानाचार्य पर कार्रवाई नहीं होती और उन्हें पद से नहीं हटाया जाता। आंदोलन जारी रहेगा। मांगे नहीं माने जाने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी गई है। अरिसदा अध्यक्ष डॉ. एसए जब्बार ने बताया कि आगे भी जिलेभर के अस्पतालों में काली पट्टी बांधकर विरोध जारी रहेगा। प्रदर्शन में डॉ. राजेन्द्र ढाका, डॉ. शीशराम गोठवाल, डॉ. पुष्पा रावत, डॉ. राजेन्द्र पायल, डॉ. जगदेव सिंह, डॉ. मधु तंवर, डॉ. आकांक्षा, डॉ. मनीषा चौधरी, डॉ. श्वेता, डॉ. दीपक देवठिया, डॉ. सपना झाझड़िया, डॉ. राहुल सोनी, डॉ. गौरव बूरी, डॉ. ईकराज अहमद, डॉ. दुष्यंत बसेरा, डॉ. प्रियंका कस्वां, डॉ. सुरेश मील, डॉ. नेमीचंद, डॉ. संदीप नेमीवाल, डॉ. प्रमोद तेतरवाल, डॉ. प्यारेलाल भालोठिया, डॉ. अरविंद जाखड़, डॉ. नवीन, डॉ. कपूर थालौर, डॉ. पूनम चौधरी सहित अनेक चिकित्सक शामिल रहे। मलसीसर में डॉ. सतवीर और डॉ. अशोक सैनी समेत चिकित्सकों ने भी काली पट्टी बांधकर विरोध किया।
इधर, छात्रों ने भी खोला मोर्चा
वहीं सोमवार को एमबीबीएस बैच 2024 और 2025 के छात्रों ने भी कक्षाओं का बहिष्कार कर धरना शुरू कर दिया और अपनी मांगों को लेकर प्रधानाचार्य को ज्ञापन सौंपा। छात्रों का कहना है कि फार्माकोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और पैथोलॉजी की प्रयोगशालाएं पूर्ण रूप से कार्यशील नहीं हैं तथा योग्य लैब तकनीशियनों की कमी है, जिससे प्रायोगिक शिक्षा प्रभावित हो रही है। छात्र राहुल शर्मा ने बताया कि क्लिनिकल एक्सपोजर के लिए बस सुविधा का आश्वासन दो-तीन माह पहले दिया गया था, लेकिन अब तक कोई व्यवस्था नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पांच बार आवेदन देने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई। छात्र अक्षय ने आरोप लगाया कि सेकेंड ईयर की लैब्स फंक्शनल नहीं हैं, खेल एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिए लगभग 50 लाख रुपये के बजट के बावजूद सुविधाएं नहीं मिल रहीं। प्रत्येक छात्र से करीब 18 हजार रुपये स्पोर्ट्स फीस ली जा रही है, लेकिन उसका उपयोग नजर नहीं आता। छात्रों ने बताया कि हॉस्टल में लंबे समय तक टेबल-चेयर नहीं थे, छात्र गद्दे बिछाकर जमीन पर सोने को मजबूर थे। परिसर में खुले गड्ढे और अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था से सुरक्षा को खतरा बताया गया। इसके अलावा परिवहन सुविधा, मेस व्यवस्था, आपातकालीन चिकित्सा सहायता, बैकअप बिजली और स्वच्छता संबंधी समस्याएं भी उठाई गईं।
प्रिंसिपल की चुप्पी से बढ़ी नाराजगी
चिकित्सकों और छात्रों का आरोप है कि लंबे समय से समस्याएं उठाई जा रही हैं। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पूरे मामले में कॉलेज प्रधानाचार्य की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल कॉलेज को लेकर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ओम कॉलोनी अंडरब्रिज की डिजाइन पर बवाल, फाटक यथावत रखने की मांग | फाटक बंद हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन |
राजस्थान बजट 2026 ऐतिहासिक: राजेन्द्र राठौड़ | चहुँमुखी विकास वाला बताया
‘एक शाम शहीदों के नाम’ | देशभक्ति गीत-कविता से भावुक हुआ सभागार
चूरू आयुष शिविर में 700 मरीजों का उपचार | विधायक हरलाल सहारण ने की सराहना















