सूरजगढ़ में आस्था का महाकुंभ 17 फरवरी से

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नौ दिन गूंजेगी श्रीमद्भागवत कथा, पांच गांवों की सहभागिता से सजेगा ऐतिहासिक मेला

सूरजगढ़ । झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
क्षेत्र में स्थित गांव सुजडौला में फरवरी माह में भक्ति, आनंद और सनातन चेतना का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। 17 से 25 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाली संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा और इसके पश्चात 25 से 27 फरवरी तक होने वाले ऐतिहासिक धार्मिक मेले को लेकर पूरे इलाके में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है। यह आयोजन बाबा आकाश गिरी महाराज के सानिध्य में संपन्न होगा। जिसमें कथावाचक आनंद कृष्ण महाराज भक्तों को भक्ति रस से सराबोर करेंगे। सूरजगढ़ क्षेत्र के गांव सुजडौला में 17 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का विशाल आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन में कथावाचक आनंद कृष्ण महाराज अपने ओजस्वी प्रवचनों और भावपूर्ण कथावाचन के माध्यम से भगवान कृष्ण की लीलाओं, भक्ति, ज्ञान और सनातन मूल्यों का जीवंत वर्णन करेंगे। कथा आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन की शुरुआत 17 फरवरी को भव्य कलश यात्रा के साथ होगी। जानकारी साझा करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और समाजसेवी महेश बसावतिया ने बताया कि इस कलश यात्रा में सैंकड़ों महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर गांव की गलियों से होते हुए कथा स्थल तक पहुंचेंगी। ढोल-नगाड़ों, भजनों और जयघोष के साथ निकाली जाने वाली यह यात्रा धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनेगी।

समाधि स्थलों पर सजेगा ऐतिहासिक धार्मिक मेला

25 फरवरी को गांव सुजडौला स्थित बाबा मठीवाला, बाबा काशीपुरी और बाबा मोहन गिरी के समाधि स्थलों पर भव्य धार्मिक मेले का आयोजन किया जाएगा। यह मेला 27 फरवरी तक चलेगा। जिसमें सुजडोला, बास, दमकोरा, लीखवा और छापड़ा गांवों की सामूहिक सहभागिता रहेगी। तीन दिवसीय यह आयोजन पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगा। पूरे धार्मिक आयोजन के दौरान मेला स्थल पर धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की भव्य छटा देखने को मिलेगी। क्षेत्र के साथ-साथ दूर-दराज से संत-महात्मा, श्रद्धालु और भक्तजन इस आयोजन में शिरकत करेंगे। आयोजन को लेकर गांव को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इस भव्य आयोजन के आयोजक समस्त ग्रामवासी हैं, जिन्होंने क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धार्मिक लाभ लेने की अपील की है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपराओं को सशक्त करने का भी संदेश देगा।

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