शेखावाटी फाउंडेशन के स्थापना दिवस के मौके पर झुंझुनूं की सात विशिष्ट प्रतिभाओं को सम्मान

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सिंघानिया विश्वविद्यालय में शेखावाटी फाउंडेशन का भव्य सम्मान समारोह, शिक्षा, संस्कृति, रोजगार पर हुआ मंथन, अरावली प्लेग्राउंड का हुआ उद्घाटन

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
जिले के पचेरी बड़ी स्थित सिंघानिया विश्वविद्यालय के शेखावाटी ऑडिटोरियम में शेखावाटी फाउंडेशन द्वारा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों ने विश्वविद्यालय के परिसर में नव निर्मित अरावली प्लेग्राउंड का भी उद्घाटन किया। कार्यक्रम के दौरान शेखावाटी फाउंडेशन द्वारा स्क्रीनिंग कमेटी के माध्यम से चयनित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट सात व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। जिनमें समाजसेवी व भामाशाह विश्वनाथ टीबड़ेवाल, शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर नवाचार के चलते अनिता पूनियां, समाजसेवी व भामाशाह शिवकरण जानूं, समाजसेवा व शिक्षा में अमूल्य योगदान देने पर परमेश्वरलाल हलवई, जाने—माने गायक रोमिल निगम, प्रतिभावान क्रिकेटर कृतिश्री व्यास तथा गायिका नेहा माहेश्वरी शामिल थी। सिंघानिया विश्वविद्यालय के प्रेजिडेंट एवं शेखावाटी फाउंडेशन के संरक्षक रिटायर्ड आईएएस डॉ. मनोज कुमार अपने स्वागत भाषण में सिंघानिया विश्वविद्यालय एवं शेखावाटी फाउंडेशन से जुड़ने के अपने प्रेरक उद्देश्यों को साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका सतत प्रयास है कि सिंघानिया विश्वविद्यालय को शेखावाटी के हर व्यक्ति से जोड़ा जाए। डॉ. मनोज कुमार ने विश्वविद्यालय के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, यूजीसी एवं विभिन्न काउंसिल से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों तथा खेलों के क्षेत्र में संस्थान की सशक्त उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सिंघानिया विश्वविद्यालय एवं सिंघानिया स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शेखावाटी फाउंडेशन झुंझुनूं के महासचिव दीपेंद्र बुडानिया ने कार्यक्रम की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए सभी के सहयोग और सामूहिक प्रयास से मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। फाउंडेशन के प्रवक्ता प्रमेंद्र कुल्हार ने शेखावाटी फाउंडेशन के गठन की प्रेरणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चूरू, झुंझुनूं एवं सीकर क्षेत्र की विलुप्त होती सांस्कृतिक धरोहरों को पुनर्जीवित करना फाउंडेशन का प्रमुख उद्देश्य है। प्रसिद्ध मूर्तिकार मातूराम जी ने सिंघानिया विश्वविद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय डीसी सिंघानिया के साथ जुड़े अपने संस्मरण साझा किए। उन्होंने विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट इंफ्रास्ट्रक्चर एवं योग्य फैकल्टी की सराहना कि। सामाजिक कार्यकर्ता परमेश्वर हलवाई ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में स्थित इस विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध अधोसंरचना के बेहतर उपयोग हेतु शेखावाटी फाउंडेशन एक सेतु की भूमिका निभा सकता है तथा शैक्षणिक संस्थानों को प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर सहयोग की भावना से कार्य करना चाहिए। गीतांजलि ज्वैलर्स के शिवकरण जानूं ने कहा कि शेखावाटी फाउंडेशन से लगातार नए लोग जुड़ रहे हैं। जिससे एक मजबूत नई नींव तैयार हो रही है। कुरड़ाराम धींवा ने अपने संबोधन में कहा कि झुंझुनूं जिले में लगाया गया शिक्षा का पौधा आज सिंघानिया विश्वविद्यालय के रूप में एक वटवृक्ष बन चुका है। उन्होंने बताया कि शेखावाटी फाउंडेशन की 37 सदस्यों की टीम शेखावाटी के हर क्षेत्र से जुड़ी हुई है तथा राष्ट्रीय स्तर पर भी फाउंडेशन की सक्रिय टीम कार्यरत है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं शेखावाटी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. दिलीप मोदी ने कार्यक्रम को गरिमामयी स्वरूप प्रदान करने के लिए सिंघानिया विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान के प्रवेश द्वार पर स्थित यह विश्वविद्यालय शेखावाटी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि शेखावाटी फाउंडेशन का उद्देश्य शेखावाटी का सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से समग्र विकास करना तथा सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना है। फाउंडेशन वर्तमान में कुएं एवं बावड़ियों के संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम के अध्यक्षीय संबोधन में सिंघानिया विश्वविद्यालय के चेयरमैन रवि सिंघानिया ने कहा कि उनका दृष्टिकोण शेखावाटी क्षेत्र के युवाओं के लिए स्किल आधारित शिक्षा प्रदान करने का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि शिक्षा के बाद विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि इसी दिशा में सिंघानिया विश्वविद्यालय ने फर्स्ट मेरिडियन कंपनी के साथ टाई-अप किया है। जो विभिन्न क्षेत्रों में ढाई लाख से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान कर रही है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के कुछ विद्यार्थियों को इस कंपनी के माध्यम से इंटर्नशिप के लिए चयनित किया गया है। नर्सिंग क्षेत्र में विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जर्मन भाषा में दक्षता प्रदान करने वाले प्रोफेशनल्स को भी विश्वविद्यालय से जोड़ा गया है। भविष्य में मेडिकल क्षेत्र में पैरा-मेडिकल कोर्सेज प्रारंभ करने पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा को प्रत्येक क्षेत्र के रोजगार से जोड़कर समाज की उन्नति में योगदान देना चाहता है। इस अवसर पर सोनल सिंघानिया, डॉ. ललित सिंह, डॉ. उमेश गुप्ता संचालक गेटवेल अस्पताल नारनौल, शेखावाटी फाउंडेशन के अन्य सदस्य चंद्रप्रकाश धूपिया, ख्वाजा आरिफ, विकास खटोड़, शिवकुमार जांगिड़, संदीप केडिया, मातूराम वर्मा, प्रमोद खंडेलिया, राजेश अग्रवाल, मनोज झाझड़िया, अजय काला, विश्वविद्यालय के पदाधिकारीगण सहित विश्वविद्यालय का स्टाफ भी कार्यक्रम में उपस्थित रहा।

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