मनरेगा बचाओ संग्राम जनआंदोलन के लिए कांग्रेस की प्रेस वार्ता
झुंझुनूं I अजीत जांगिड़
सर्किट हाउस में कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा बचाओ संग्राम-जनआंदोलन के संदर्भ में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता को जिला प्रभारी रामसिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह, मंडावा विधायक व जिलाध्यक्ष रीटा चौधरी ने संबोधित किया। ओबीसी कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष सैनी, डीसीसी के निवर्तमान उपाध्यक्ष राजकुमार ढाका भी इस दौरान मौजूद रहे। कांग्रेस जिला प्रभारी रामसिंह कस्वां ने मरेगा के बारे विस्तार से बताते हुए कहा कि मनरेगा कांग्रेस का जनहित में बनाया गया ऐसा कानून है। जिससे लोगों को रोजगार मांगने का हक मिला। काम का अधिकार मिला। इस कानून के तहत 12 करोड़ लोग लाभान्वित हो रहे हैं। मनरेगा कानून लागू होने के बाद पांच करोड़ लोग बीपीएल श्रेणी से लॉ मीडिल क्लास में आ पाए हैं। विश्लेषण के अनुसार मनरेगा में अब तक औसतन 55 दिन रोजगार मिला है। भाजपा 125 दिन रोजगार की गारंटी का नाम लेकर लोगों को भ्रमित कर रही है। केंद्र का हिस्सा 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत करके, काम देने का निर्णय केंद्र के पास रखकर, महात्मा गांधीजी का नाम हटाकर सरकार की मनरेगा को खत्म करने की यह साजिश उनकी गरीब, मजदूर, किसान विरोधी नीति का हिस्सा है। कांग्रेस पार्टी हमेशा गरीब, मजदूर और किसानों की हितैषी पार्टी रही है। उनके हित के पार्टी ने मनरेगा बचाओ संग्राम के रूप में व्यापक जनआंदोलन का आगाज किया है। पूर्व मंत्री डॉ. जितेंद्रसिंह ने वार्ता में कहा कि महात्मा गांधी केवल नाम नहीं है। बल्कि पूरे विश्व में शांति, अहिंसा का पर्याय है। भाजपा के लोग उनके नाम को ही मिटाना चाहती है। राम का नाम जोड़ने से भी बल्कि लोगों को काम मिलने से भला होगा। लोगों को स्थानीय स्तर पर काम मिलने से उनके प्रवास में कमी आई है।मंडावा विधायक व जिलाध्यक्ष रीटा चौधरी ने कहा कि मनरेगा ने लोगों को रोजगार का अधिकार दिया। जिसके अनुसार 15 दिन में रोजगार देना राज्यों का दायित्व था। केंद्र के हिस्से को 60 प्रतिशत और राज्य का हिस्सा 40 प्रतिशत करना गलत है। क्योंकि राज्यों के वित्तीय हालत ठीक नहीं है। वे पहले से ही कर्ज में डूबी हुई है। जब पैसा नहीं है तो काम शुरू ही नहीं हो पाएंगे। काम कहां करना यह निर्णय केंद्र के पास रहने से ये भेदभाव करेंगे। जहां भाजपा की सरकार है। वहां ये काम दे देंगे और जहां इनकी सरकार नहीं है। वहां काम नहीं देंगे। कांग्रेस पार्टी ने हर व्यक्ति को काम का अधिकार देने के उद्देश्य से यह योजना बनाई थी। पूरा विश्व जब आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा था। तब भारत पूरी मजबूती के साथ अपने पैरों पर खड़ा था विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था। इसका श्रेय कांग्रेस की मनरेगा योजना को ही था। केंद्र में एसी में बैठे लोग कैसे तय कर सकते है कि कौनसी पंचायत में क्या काम होना है। यह अधिकार तो पंचायतों के पास ही रहना चाहिए। इन लोगों ने योजना आयोग जैसी संस्थाओं को ही खत्म कर दिया। रीटा ने जानकारी दी कि मनरेगा बचाओ संग्राम-जनआंदोलन के तहत 11 जनवरी को अंबेडकर पार्क में सुबह 11 से दोपहर दो बजे तक उपवास रखकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे। उसके बाद 12-29 जनवरी तक विधानसभा, पंचायत, मंडल और बूथ स्तर तक जनजागरण अभियान चलाएंगे। वहीं 30 जनवरी को पंचायत राज संस्थाओं के वार्डों और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों द्वारा शांतिपूर्ण धरना देंगे और 31 जनवरी से छह फरवरी को जिला स्तर पर धरना प्रदर्शन और ज्ञापन दिया जाएगा।
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