हमीरी कलां के जवान संजीव तेतरवाल का हुआ निधन

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तकरीबन 13 किलोमीटर लंबी तिरंगा रैली निकाली गई

झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
जिला मुख्यालय के साथ लगते हमीरी कलां गांव के रहने वाले एक और लाडले ने देश सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी है। जिनका शनिवार को गांव में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। जानकारी के अनुसार हमीरी कलां निवासी संजीव तेतरवाल सीआरपीएफ में कांस्टेबल के पद पर गुवाहाटी में तैनात थे। जिनकी दो दिन पहले गुरूवार को अचानक तबियत बिगड़ी। जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां से उन्हें हाई सेंटर पर रैफर किया गया। लेकिन इसी दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। शनिवार सुबह उनकी पार्थिव देह झुंझुनूं सैनिक कल्याण बोर्ड पहुंची। जहां से सैंकड़ों की संख्या में युवाओं ने तिरंगा रैली निकाली और रैली की अगुवाई में ही पार्थिव देह झुंझुनूं शहर से 13 किलोमीटर दूर हमीरी कलां गांव ले जाया गया। यहां पर सभी ने अपने लाडले के अंतिम दर्शन किए और अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। जयपुर से आई सीआरपीएफ की टुकड़ी ने गार्ड आफ आनर दिया। पूरे सैन्य सम्मान के साथ संजीव का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में शामिल हुए जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, सीआरपीएफ के जवानों ने भी पुष्प अर्पित किए। आपको बता दें कि संजीव तेतरवाल का अगले साल कांस्टेबल से हैड कांस्टेबल के पद पर प्रमोशन होना था। उन्हें सीआरपीएफ में भर्ती हुए 11 साल के करीब का समय हो गया था। हाल ही में बिहार चुनाव में दो महीने की ड्यूटी के बाद वे वापिस गुवाहाटी लौटे थे और अगले महीने दिसंबर में ही घर पर छुट्टी लेकर आने वाले थे। उनके पिता धर्मपाल सिंह तेतरवाल, शिक्षा विभाग से रिटायर डिप्टी डायरेक्टर है और मां बिमला देवी गृहिणी है। पत्नी पिंकेश भी गृहिणी है। पांच साल का एक बेटा दिशान है। जो उनके साथ ही गुवाहाटी रहते थे। लेकिन बिहार चुनाव में जाने से पहले पत्नी और बेटा, दोनों गांव आ गए थे। जिन्हें भी वापिस ले जाने के लिए वे दिसंबर में आने वाले थे। संजीव तेतरवाल के बड़े भाई विकास तेतरवाल, गांव में ही पंचायत शिक्षक है।

परिवार से करते थे प्यार, हर दिन कॉल करते थे

संजीव तेतरवाल अपने परिवार से प्यार करते थे। संजीव ने कहीं भी ड्यूटी की हो। लेकिन हर सुबह और शाम को पिता धर्मपाल सिंह और माता बिमला देवी से बात करना भी उनकी ड्यूटी में शामिल था। बात चाहे दो मिनट हो या फिर ज्यादा देर। लेकिन सुबह ड्यूटी पर जाने से पहले अपनी मां बिमला देवी को फोन करते थे। उसी समय पर अक्सर पिता से बात होती थी। तो शाम को ड्यूटी से आने के बाद भी मां को फोन करके हाल—चाल और खाने—पीने की पूछते थे। गुरूवार को भी सुबह और दोपहर, दो बार संजीव की बात अपनी मां और पत्नी से हुई थी। लेकिन दोपहर को अचानक तबियत बिगड़ी। इसके बाद गुवाहाटी से परिजनों के पास तबियत खराब होने का फोन आया। जब घर के लोग रवाना हो रहे थे। उसी वक्त थोड़ी देर बार उनके निधन की गमगीन खबर भी आ गई।

11 साल से ज्यादा समय हो गया भर्ती हुए

संजीव तेतरवाल के बड़े भाई पंचायत शिक्षक विकास तेतरवाल ने बताया कि संजीव की सीआरपीएफ में भर्ती को करीब 11 साल हो गए थे। भर्ती होते हीए विकास को करीब एक साल दिल्ली मुख्यालय रखा गया। इसके बाद केरल, छत्तीसगढ़, जोधपुर और अब गुवाहाटी पोस्टिंग थी। अगले साल ही संजीव हैड कांस्टेबल के पद पर प्रमोट होने वाले थे।

20 को ही लौटे थे बिहार से, आने वाले थे गांव

संजीव तेतरवाल के भाई विकास तेतरवाल ने बताया कि दो महीने के लिए संजीव को बिहार चुनाव में लगाया गया था। उससे पहले संजीव ने अपनी पत्नी पिंकेश तथा बेटे दिशान को गांव भेज दिया था। अब 20 नवंबर को ही संजीव बिहार चुनाव से वापिस लौटे थे और गांव आने का कार्यक्रम बना रहे थे। उनसे परिजनों की कॉल पर बातचीत भी हुई थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि दिसंबर में वे छुट्टी लेकर गांव आएंगे। तो सबसे मिलना भी हो जाएगा और अपने साथ ही पत्नी पिंकेश और बेटे दिशान को ले जाएंगे। दिशान गुवाहाटी में ही यूकेजी में पढता है। चार—पांच महीने पहले भी संजीव गांव आकर गए थे।

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