राजकीय सम्मान न मिलने को लोकतंत्र पर चोट बताया, “मल्लिक साहब किसानों की सच्ची आवाज थे”
हनुमानगढ़।हिमांशु मिढ्ढा
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के आह्वान पर श्रद्धांजलि सभा में सैकड़ों की संख्या में लोग एकत्रित हुए और पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा में कई किसान संगठनों, राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ स्थानीय विधायक गणेश राज बंसल भी शामिल हुए।सभा में मौजूद लोगों ने “सत्यपाल मल्लिक अमर रहें” के नारे लगाए और दो मिनट का मौन रखकर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उपस्थित किसानों और नेताओं ने इस बात पर गहरा आक्रोश जताया कि इतने बड़े संवैधानिक पदों पर आसीन रहने वाले और किसानों की आवाज बुलंद करने वाले नेता को राजकीय सम्मान नहीं दिया गया। इसे लोकतंत्र और संवैधानिक मर्यादाओं पर गहरी चोट करार दिया गया।श्रद्धांजलि सभा में सुभाष गोदारा, सचिन कौशिक, गरमीत सिंह चंदड़ा, राय साहब चाहर मल्लड़खेड़ा, चरणजीत सिंह, रविंद्र सिंह, प्रोजेक्ट चेयरमैन मनप्रीत सिंह मक्कासर, मनप्रीत बनवाला, संदीप कग, मनदीप सिंह, गुरप्यार सिंह, बलविंदर सिंह, महावीर स्याग, विजय सिंह डूडी, दिनेश गोदारा, कपिल सहारण, राहुल जाखड़, केवल काकड़, दीपक गजरा, रितेश बेनीवाल, रणजीत सिंह, सद्दाम हुसैन, काले खां, उत्तम सिंह सहित अनेक किसान नेता व सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।सभा को संबोधित करते हुए बीकेयू के जिला अध्यक्ष रेशम सिंह मानुका ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने ऊंचे संवैधानिक पदों पर रहने के बावजूद मल्लिक साहब को राजकीय सम्मान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यह घटना स्पष्ट करती है कि मौजूदा सरकार किसानों और आमजन के पक्ष में खड़े होने वालों से असहज महसूस करती है।मानुका ने कहा कि सत्यपाल मल्लिक ने अपने कार्यकाल के दौरान खुलेआम किसानों की समस्याओं को उठाया, सरकार की नीतियों पर सवाल किए और किसान आंदोलन में नैतिक व सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया। यही कारण था कि सरकार के लिए उनका बेबाक रुख “पच” नहीं रहा। उन्होंने कहा, “किसान कौम मल्लिक साहब के योगदान और साहस को कभी नहीं भूलेगी, वह हमेशा किसानों की सच्ची आवाज बने रहेंगे।”सभा में राय साहब चाहर मल्लड़खेड़ा ने कहा कि मल्लिक साहब ने अपने राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन में हमेशा सच का साथ दिया और अन्याय के खिलाफ खड़े रहे। उनकी ईमानदारी, निडरता और किसानों के प्रति समर्पण को आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।स्थानीय लोगों और किसान नेताओं ने यह भी संकल्प लिया कि वे मल्लिक साहब के बताए रास्ते पर चलकर किसानों और आम जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। श्रद्धांजलि सभा के अंत में सभी ने एक स्वर में कहा कि लोकतंत्र की रक्षा और किसान हितों के लिए सत्यपाल मल्लिक का जीवन प्रेरणा स्रोत रहेगा।