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शेखावाटी की जीवन रेखा बचाने उठा जनसैलाब, सिंधु जल से पुनर्जीवन की मांग तेज, नदी जोड़ो योजना से 80 लाख आबादी को मिल सकता है लाभ
झुंझुनूं। अजीत जांगिड़
कभी शेखावाटी अंचल की जीवन रेखा कही जाने वाली काटली नदी आज अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। हालात इतने गंभीर हैं कि नई पीढ़ी इस नदी को केवल बुजुर्गों की कहानियों में ही सुन पा रही है। अवैध खनन, अतिक्रमण, जल स्रोतों के मार्ग में बदलाव, सहायक नालों पर कब्जे, एनीकट व बांध निर्माण, अत्यधिक जल दोहन और घटती हरियाली ने मिलकर इस नदी को लुप्तप्राय बना दिया है।
जन आंदोलन बना ‘काटली बचाओ अभियान’
ग्राउंड से लेकर कोर्ट तक उठी आवाज, अब प्रधानमंत्री तक पहुंचेगी मांग – झुंझुनूं की सरस्वती रूरल एंड अर्बन डेवलपमेंट सोसायटी ने इस संकट को लेकर “काटली नदी बचाओ जन अभियान” शुरू किया है। अभियान संयोजक सुभाष कश्यप के नेतृत्व में जनजागृति के साथ-साथ विस्तृत पुनर्जीवन योजना तैयार कर मुख्यमंत्री सहित विभिन्न विभागों को ज्ञापन सौंपे गए हैं। वहीं, अमित कुमार और कैलाश मीणा द्वारा दायर याचिका पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ( एनजीटी ) के आदेश के बाद नदी संरक्षण की दिशा में कानूनी रास्ता भी साफ हुआ है।
सरकार हरकत में, ड्रोन सर्वे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
मैदानी स्तर पर शुरू हुआ काम, लेकिन चुनौतियां बरकरार – राजस्थान सरकार ने काटली नदी की वास्तविक स्थिति जानने के लिए ड्रोन सर्वे कराया है और पुनर्जीवन योजना पर काम शुरू कर दिया है। नदी क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी जारी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल यह प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे, क्योंकि नदी के पारंपरिक जल स्रोत लगभग समाप्त हो चुके हैं।
सिंधु जल से ‘काटली’ को नया जीवन देने की मांग
नदी जोड़ो योजना से 80 लाख आबादी को मिल सकता है लाभ
अभियान से जुड़े लोगों ने अब बड़ा प्रस्ताव रखा है— काटली नदी में बने एनीकट व बांध हटाए जाएं या फिर उनमें सिंधु जल लाकर प्रवाहित किया जाए I जोधपुरा सुनारी, हीरवाना, मैनपूरा और बगड़ क्षेत्र में कच्चे बांध बनाकर सिंधु जल लाने की योजना भी सुझाई गई है। यदि यह योजना साकार होती है, तो अनुमानित 80 लाख से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। इससे जैव विविधता लौटेगी , जलवायु संतुलन सुधरेगा , पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा , स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे I
प्रधानमंत्री तक पहुंचेगी मांग, बनेगा राष्ट्रीय मुद्दा
“जन-जन का अभियान”, अब देशव्यापी समर्थन की अपील – अभियान संयोजक सुभाष कश्यप और उनकी टीम जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर सिंधु जल को काटली नदी में लाने की मांग उठाएंगे और विस्तृत योजना प्रस्तुत करेंगे।अभियान को जन-जन से जोड़ने की अपील करते हुए कश्यप ने कहा कि यह केवल नदी नहीं, बल्कि पूरे शेखावाटी के भविष्य की लड़ाई है।
“अगर अब नहीं जागे, तो इतिहास बन जाएगी काटली”
काटली नदी का मुद्दा अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है। सरकारी प्रयास, जन आंदोलन और न्यायिक हस्तक्षेप के बावजूद यदि ठोस और दीर्घकालिक समाधान नहीं निकला, तो आने वाली पीढ़ियां केवल “काटली” का नाम ही सुनेंगी।
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