मरीजों के हक पर डाका: नवलगढ़ जिला अस्पताल से 12 लाख के इंजेक्शन गायब

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सरकारी अस्पताल में इंजेक्शन एक साल तक गायब होते रहे और किसी को भनक तक नहीं लगी ?
एक साल में 323 इंजेक्शन चोरी, वार्ड में घूमती युवती के बैग से 8 बरामद; सुरक्षा और सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

नवलगढ़ । झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाते हुए नवलगढ़ जिला अस्पताल में लाखों रूपए के इंजेक्शन चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं, बल्कि पूरे एक साल में धीरे-धीरे 323 इंजेक्शन गायब कर दिए गए। इनकी कुल कीमत करीब 12 से 16 लाख रुपए के बीच बताई जा रही है। मामले का खुलासा तब हुआ जब अस्पताल के वार्ड में संदिग्ध रूप से घूम रही एक युवती को पकड़ा गया। तलाशी लेने पर उसके बैग से सरकारी सप्लाई के 8 महंगे इंजेक्शन बरामद हुए, जिससे पूरे घोटाले का पर्दाफाश हो गया ।

ऐसे खुला करोड़ों के इलाज से जुड़ा खेल

अस्पताल प्रशासन को लंबे समय से इंजेक्शन स्टॉक में गड़बड़ी का शक था, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिल पा रहा था। इसी बीच वार्ड में संदिग्ध गतिविधि देख स्टाफ ने एक युवती को पकड़ा। पूछताछ और तलाशी में इंजेक्शन मिलने के बाद मामला गंभीर हो गया। पीएमओ की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने दिपाली नामक युवती के खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज किया है। जांच के दौरान अस्पताल के एक संविदाकर्मी, जो डायलिसिस टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत है, की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इससे अंदरूनी मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह चोरी कोई एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही संगठित लापरवाही या मिलीभगत का हिस्सा हो सकती है।

मरीजों के इलाज पर सीधा असर

यह इंजेक्शन सामान्य नहीं, बल्कि गंभीर मरीजों के इलाज में काम आने वाले महंगे इंजेक्शन बताए जा रहे हैं। ऐसे में इनकी चोरी का सीधा असर गरीब मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है, जो सरकारी अस्पताल पर निर्भर हैं।

एक साल तक कैसे गायब होते रहे इंजेक्शन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 323 इंजेक्शन एक साल तक गायब होते रहे और किसी को भनक तक नहीं लगी ?

क्या स्टॉक रजिस्टर में हेराफेरी हुई?

क्या अंदरूनी मिलीभगत है?

क्या निगरानी सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है?

संगठित रैकेट से जुड़ा हो सकता है मामला

प्रारंभिक जांच में यह मामला एक संगठित रैकेट से जुड़ा माना जा रहा है, जो इन महंगे इंजेक्शनों को निजी अस्पतालों या खुले बाजार में बेच सकता है। पीएमओ डॉ. महेंद्र सबलानिया द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, एक साल की अवधि में कुल 894 इंजेक्शन अस्पताल में सप्लाई किए गए थे, जिनमें से 323 गायब पाए गए ॥
मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में और लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है और जल्द ही कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर करारा तमाचा

यह मामला सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रतीक बन गया है। जिस अस्पताल में मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, वहीं उनकी जिंदगी से जुड़े संसाधनों की चोरी होना बेहद गंभीर चिंता का विषय है। यह घटना अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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