महंगी किताबें, जबरन ड्रेस बदलाव और स्कूल में बिक्री पर सख्ती — 15 अप्रैल तक औचक जांच, दोषी पाए जाने पर जुर्माना से लेकर मान्यता रद्द तक की तैयारी
झुंझुनूं । अजीत जांगिड़
शिक्षा के नाम पर अभिभावकों की जेब पर पड़ रहे अतिरिक्त बोझ को लेकर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि निजी स्कूलों की मनमानी अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एनसीईआरटी या आरबीएसई की जगह कमीशन के लालच में महंगी किताबें लगवाने, बिना तय समय के ड्रेस बदलने और स्कूल परिसर में ही जूते-टाई-बेल्ट बेचने जैसे मामलों पर अब कड़ा एक्शन तय है।
बीकानेर निदेशालय के निर्देश के बाद झुंझुनूं जिले में हाई अलर्ट
बीकानेर स्थित शिक्षा निदेशालय के सख्त निर्देशों के बाद झुंझुनूं जिले में व्यापक स्तर पर निगरानी अभियान शुरू कर दिया गया है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों ( बीईओ ) के नेतृत्व में विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं, जो निजी स्कूलों में औचक निरीक्षण कर रही हैं। यह अभियान 15 अप्रैल तक चलेगा, जबकि 20 अप्रैल तक पूरी रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाएगी। बीईओ के नेतृत्व में ‘ग्राउंड एक्शन’, हर स्कूल की होगी जांच – निजी स्कूलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जिले में 33 अधिकारियों की टीम को मैदान में उतारा गया है। प्रत्येक ब्लॉक में बीईओ खुद जांच दल की कमान संभालेंगे। उनके अधीन तीन सदस्यीय टीमें स्कूलों में अचानक पहुंचकर हर पहलू की पड़ताल करेंगी, ताकि किसी भी स्तर पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण न हो सके।
इन चार मोर्चों पर सख्त निगरानी
– जांच टीमों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे खास तौर पर इन मुद्दों पर फोकस करें— क्या स्कूल किसी
– विशेष दुकान या ब्रांड से ही सामान खरीदने के लिए दबाव बना रहा है?
– क्या स्कूल परिसर में ही जूते, टाई, बेल्ट या स्टेशनरी की बिक्री हो रही है?
– क्या बिना तीन साल का अंतराल पूरा किए या बिना सूचना के ड्रेस बदली गई है?
– क्या एनसीईआरटी / आरबीएसई की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें सिर्फ कमीशन के लिए लागू की गई हैं?
नियम तोड़े तो ‘मान्यता रद्द’ तक की कार्रवाई
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी अशोक शर्मा ने दो टूक कहा है कि शिक्षा का व्यवसायीकरण अब नहीं चलेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और गंभीर मामलों में मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जाएगी।
अभिभावकों को भी मिला अधिकार: सीधे करें शिकायत
शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को भी सशक्त किया है। यदि कोई स्कूल जबरन खरीदारी या नियमों का उल्लंघन करता है, तो अभिभावक सीधे अपने क्षेत्र के बीईओ कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
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